लखनऊ: एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। लखनऊ में एक व्यक्ति से मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने का झांसा देकर ₹18.25 लाख रुपये ठग लिए गए। पीड़ित की शिकायत पर विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, झारखंड के डालटनगंज निवासी संतोष कुमार साहू ने अपनी बेटी के एमबीबीएस दाखिले के लिए ऑनलाइन माध्यम से एक कंसल्टेंसी से संपर्क किया था। पीड़ित ने बताया कि इंटरनेट पर उन्हें ‘स्टडी पाथवे कंसल्टेंसी’ नाम की एक वेबसाइट मिली, जिसमें मेडिकल प्रवेश से जुड़ी सेवाओं का दावा किया गया था।
शिकायत के मुताबिक, वेबसाइट पर दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बाद अभिनव शर्मा नामक व्यक्ति ने उनसे बातचीत की। आरोपी ने उनकी बेटी को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने का भरोसा दिया और मेडिकल सीट सुनिश्चित कराने के नाम पर रकम की मांग की।
पीड़ित का आरोप है कि आरोपी ने हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹18.25 लाख रुपये जमा करवा लिए। काफी समय बीतने के बाद भी जब दाखिला नहीं हुआ तो संतोष कुमार ने मामले की पड़ताल शुरू की। जांच में उन्हें कथित तौर पर फर्जीवाड़े की जानकारी मिली।
पीड़ित के अनुसार, जब उन्होंने कंसल्टेंसी से संपर्क करने की कोशिश की तो गोमतीनगर स्थित कार्यालय बंद मिला। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कराई गई थी, वह बिहार के समस्तीपुर निवासी संतोष कुमार के नाम पर दर्ज है।
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पुलिस अब बैंक खातों, लेनदेन विवरण और आरोपियों के संपर्कों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी के पीछे कितने लोग शामिल हैं और क्या इस नेटवर्क ने अन्य छात्रों या अभिभावकों को भी अपना शिकार बनाया है।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल और प्रोफेशनल कोर्स में दाखिले के नाम पर होने वाली ठगी में अपराधी छात्रों और अभिभावकों की चिंता तथा सीमित समय में सीट मिलने के दबाव का फायदा उठाते हैं। फर्जी कंसल्टेंसी वेबसाइट, नकली दस्तावेज और प्रभावशाली दावों के जरिए लोगों को भरोसे में लिया जाता है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए निजी एजेंटों या कंसल्टेंसी को बड़ी रकम देने से पहले उनकी वैधता की जांच करनी चाहिए। कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट, प्रवेश प्रक्रिया और मान्यता संबंधी जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था या व्यक्ति द्वारा सीट पक्की कराने, मैनेजमेंट कोटा या तुरंत दाखिले का दावा किए जाने पर सतर्क रहना चाहिए। बिना सत्यापन के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करना भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तकनीकी साक्ष्यों तथा वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
