कानपुर से जुड़े चर्चित जीएसटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। एजेंसी ने इस मामले में अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण संबंधित जांच एजेंसियों से मांगा है और आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों की पहचान तथा वित्तीय गतिविधियों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, ईडी की जांच का केंद्र कथित तौर पर उन वित्तीय लेनदेन पर है जिनके जरिए बड़े पैमाने पर धन को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि संदिग्ध लेनदेन के जरिए अवैध धन को वैध दिखाने का प्रयास किया गया हो सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और संबंधित खातों का विश्लेषण किया जा रहा है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान एक दर्जन से अधिक बैंकों में संचालित 65 से ज्यादा खातों के माध्यम से करीब ₹1,600 करोड़ का लेनदेन हुआ। अधिकारियों का दावा है कि इन लेनदेन का वास्तविक उद्देश्य और स्रोत संदिग्ध प्रतीत होते हैं। वहीं जांच में यह भी सामने आया है कि विभिन्न खातों के जरिए कुल मिलाकर लगभग ₹3,200 करोड़ के कथित अवैध वित्तीय प्रवाह का नेटवर्क सक्रिय था।
मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके महफूज अली पर आरोप है कि उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कई कारोबारियों और व्यावसायिक संस्थानों की धनराशि को विभिन्न खातों के जरिए स्थानांतरित करने की व्यवस्था बनाई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का इस्तेमाल कथित तौर पर बड़ी मात्रा में धन को अलग-अलग खातों में घुमाकर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था।
जांचकर्ताओं का मानना है कि इस कथित नेटवर्क से जुड़े कुछ कारोबारी पंजाब, गुजरात, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि धन का वास्तविक स्रोत क्या था और किन-किन व्यक्तियों या संस्थाओं को इस कथित वित्तीय गतिविधि से लाभ पहुंचा।
मामले में बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए वित्तीय लेनदेन के दौरान नियामकीय निगरानी और अनुपालन प्रक्रियाओं का किस प्रकार पालन किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या मिलीभगत के साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि धन शोधन के मामलों में आमतौर पर बहुस्तरीय खातों, शेल संस्थाओं और जटिल बैंकिंग लेनदेन का उपयोग फंड ट्रेल को छिपाने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग डेटा और वित्तीय दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होते हैं।
फिलहाल ईडी विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं का मिलान कर रही है और आरोपियों की संपत्तियों का विवरण जुटाया जा रहा है। जांच के अगले चरण में संदिग्ध लेनदेन से जुड़े अन्य व्यक्तियों, संस्थाओं और संभावित लाभार्थियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आने वाले समय में इस कथित वित्तीय नेटवर्क से जुड़े और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।
