अरुणाचल प्रदेश में सामने आए एक बड़े कथित निवेश धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने असम निवासी एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिस पर एक कारोबारी से ₹34.33 करोड़ से अधिक की रकम ठगने का आरोप है। जांच के अनुसार आरोपी ने खुद को प्रभावशाली कारोबारी बताकर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों से करीबी संबंध होने का दावा किया तथा कथित रूप से फर्जी सरकारी दस्तावेजों और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर निवेशक का विश्वास जीता।
मामला तब सामने आया जब एक कारोबारी ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि उसे असम में प्रस्तावित एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) निर्माण परियोजना में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये लगाने के लिए प्रेरित किया गया। शिकायत के अनुसार आरोपी ने दावा किया था कि परियोजना को उच्च स्तर का समर्थन प्राप्त है और इसके लिए आवश्यक सरकारी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। इन दावों को विश्वसनीय बनाने के लिए कथित तौर पर कई दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिन्हें बाद में जांच एजेंसियों ने संदिग्ध माना।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने खुद को वित्तीय रूप से बेहद प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। आरोप है कि उसने विभिन्न सरकारी विभागों और शीर्ष प्रशासनिक स्तरों से निकट संबंध होने का दावा किया और इसी आधार पर कारोबारी को बड़े निवेश के लिए राजी किया। जांचकर्ताओं के अनुसार निवेशक ने वर्ष 2022 से शुरू हुई अवधि में कई चरणों में ₹34.33 करोड़ से अधिक की राशि आरोपी को हस्तांतरित की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं की मदद से आरोपी का पता लगाया। इसके बाद उसे गुवाहाटी से गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई मोबाइल फोन और लगभग ₹1.5 करोड़ मूल्य का एक लग्जरी वाहन भी जब्त किया। अधिकारियों का मानना है कि जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मामले के डिजिटल पहलुओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। पुलिस के अनुसार आरोपी कथित रूप से एक फर्जी व्हाट्सऐप अकाउंट संचालित कर रहा था, जिसमें एक प्रमुख राजनीतिक नेता की प्रोफाइल फोटो का उपयोग किया गया था। इसके अलावा कुछ तस्वीरें और डिजिटल सामग्री भी साझा की गईं, जिनसे यह आभास होता था कि आरोपी का प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक व्यक्तियों से निकट संबंध है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि कथित तौर पर इस्तेमाल की गई एक ऑडियो कॉल वास्तविक थी या फिर उसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अथवा आवाज की नकल करने वाली तकनीक से तैयार किया गया था।
पुलिस द्वारा बैंक खातों, केवाईसी रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक संदेशों, स्क्रीनशॉट और संदिग्ध दस्तावेजों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में शिकायत के कई बिंदुओं की पुष्टि होने के संकेत मिले हैं। अधिकारियों को यह भी संदेह है कि कथित धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि विभिन्न सहयोगियों, परिजनों और कारोबारी संस्थाओं से जुड़े खातों के माध्यम से स्थानांतरित की गई हो सकती है। इसी कारण धन के पूरे प्रवाह का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि आधुनिक वित्तीय ठगी में अपराधी केवल झूठे वादों पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि डिजिटल पहचान, सोशल इंजीनियरिंग और तकनीकी साधनों का भी उपयोग करते हैं। उनके अनुसार, “जब अपराधी फर्जी दस्तावेजों, प्रभावशाली व्यक्तियों की तस्वीरों, नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल और संभावित एआई आधारित आवाज तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, तो पीड़ित के लिए धोखाधड़ी की पहचान करना और कठिन हो जाता है। निवेश से पहले स्वतंत्र सत्यापन और आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि अत्यंत आवश्यक है।”
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि निवेशकों को किसी भी परियोजना में बड़ी रकम लगाने से पहले नियामकीय स्वीकृतियों, कंपनी के रिकॉर्ड और वित्तीय दावों की स्वतंत्र जांच करनी चाहिए। केवल डिजिटल संदेशों, सोशल मीडिया सामग्री या कथित राजनीतिक संपर्कों के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
फिलहाल पुलिस धन के पूरे ट्रेल, संभावित सह-साजिशकर्ताओं, लाभार्थियों और कथित फर्जी दस्तावेजों की उत्पत्ति की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की परतें खुलने के साथ और भी महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं तथा जांच के आधार पर अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
