कानपुर के दहेज उत्पीड़न मामले में अदालत ने पति समेत चार आरोपियों को तलब करते हुए जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

दहेज उत्पीड़न केस में बड़ा मोड़: कोर्ट ने चार रिश्तेदारों को किया तलब, आईपीएस अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति

Team The420
4 Min Read

कानपुर। दहेज उत्पीड़न के एक चर्चित मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए पति समेत चार आरोपियों को तलब कर लिया है। साथ ही मामले की जांच प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन स्वरूपनगर एसीपी और आईपीएस अधिकारी सुमित रामटेके के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी की है। अदालत ने इस संबंध में आदेश की प्रति राज्य के पुलिस महानिदेशक और प्रमुख सचिव गृह को भेजने का निर्देश दिया है।

मामला गीतानगर निवासी निकिता जायसवाल से जुड़ा है, जिनका विवाह 16 नवंबर 2024 को दिल्ली निवासी आयुष गुप्ता के साथ हुआ था। विवाह के बाद निकिता गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थीं। आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद ही उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। पीड़िता ने 21 सितंबर 2025 को काकादेव थाने में पति आयुष गुप्ता, सास अलका गुप्ता, ससुर दीपक गुप्ता, ननद तथा ममिया ससुर अश्वनी शर्मा के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।

मामले की प्रारंभिक विवेचना के दौरान जांच अधिकारी ने उपलब्ध साक्ष्यों और बयान के आधार पर पति, सास और ससुर के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर उसे एसीपी कार्यालय भेज दिया था। आरोप है कि इसके बाद तत्कालीन एसीपी स्वरूपनगर ने मामले की अग्रिम विवेचना के आदेश देते हुए जांच दूसरे विवेचक को सौंप दी। यहीं से पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया।

FutureCrime Summit Invites OSINT and DFIR Startups to Showcase Their Innovations at Bharat Mandapam

पीड़िता पक्ष के अनुसार, दूसरे विवेचक ने आगे की जांच के बाद केवल पति आयुष गुप्ता के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर अदालत में दाखिल कर दी, जबकि पहले की विवेचना में अन्य परिजनों की भूमिका भी सामने आई थी। जब अदालत से जारी समन की जानकारी पीड़िता को मिली तो उनके अधिवक्ता ने चार्जशीट पर आपत्ति दर्ज कराई और आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त आधार के अन्य आरोपियों के नाम जांच से हटा दिए गए।

अदालत ने आपत्ति पर सुनवाई के दौरान केस डायरी, जांच अभिलेखों और अन्य उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि मामले में ऐसे पर्याप्त आधार मौजूद हैं जिनके चलते केवल पति ही नहीं बल्कि सास, ससुर और ममिया ससुर की भूमिका की भी न्यायिक जांच आवश्यक है। इसके बाद अदालत ने पति आयुष गुप्ता, अलका गुप्ता, दीपक गुप्ता और अश्वनी शर्मा को आरोपी मानते हुए 31 जुलाई को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए समन जारी कर दिया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने अग्रिम विवेचना की प्रक्रिया और आरोपियों के नाम हटाए जाने के तरीके पर भी गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय ने माना कि मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई कार्रवाई से जांच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। इसी आधार पर तत्कालीन स्वरूपनगर एसीपी आईपीएस सुमित रामटेके के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई।

अदालत के आदेश के बाद यह मामला अब केवल दहेज उत्पीड़न तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जांच प्रक्रिया और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही का भी विषय बन गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जिनमें विवेचना के दौरान आरोपियों के नाम हटाने या जांच की दिशा बदलने को लेकर विवाद सामने आते हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के संबंध में उच्च स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है और आगामी सुनवाई में आरोपित पक्ष अदालत के समक्ष क्या रुख अपनाता है।

हमसे जुड़ें

Share This Article