नई दिल्ली। इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में तेजी के बीच Ola Electric को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। अहमदाबाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह S1 X Plus स्कूटर के मालिक को पूरा वाहन मूल्य ₹1.06 लाख ब्याज सहित वापस करे और अतिरिक्त ₹40,000 मानसिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में दे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि भुगतान 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा, अन्यथा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।
यह मामला अहमदाबाद के सैटेलाइट क्षेत्र के रहने वाले स्वाति एम. मखीजा, मनोहर मखीजा और नितिन मखीजा द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है। परिवार ने जनवरी 2024 में Ola S1 X Plus इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदा था, जिसकी ऑन-रोड कीमत लगभग ₹1.03 लाख थी। खरीद के कुछ ही दिनों बाद वाहन में तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं, जिसके बाद उपभोक्ताओं ने कंपनी की सेवा और उत्पाद गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
शिकायत के अनुसार, स्कूटर की डिलीवरी के सिर्फ दो दिन बाद ही पीछे से असामान्य आवाज आने लगी। इसे लेकर वाहन को सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां कथित रूप से ब्रेक पैड को बदला नहीं गया बल्कि केवल आंशिक रूप से घिसा गया। बाद में फरवरी 2024 में स्कूटर में गंभीर डिजिटल सिस्टम फेलियर हुआ, जिससे चलते-चलते वाहन अचानक बंद हो गया। यह घटना तब हुई जब परिवार वाहन का उपयोग कर रहा था, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई।
लगातार खराबियों और असंतोषजनक सेवा से परेशान होकर परिवार ने कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि वाहन में बार-बार तकनीकी खामियां आईं और कंपनी की ओर से प्रभावी समाधान नहीं दिया गया। आयोग ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को बेचे गए उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा की जिम्मेदारी निर्माता की होती है।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
कंपनी की दलीलों को आयोग ने अस्वीकार कर दिया, जिसमें यह कहा गया था कि खराबी उपयोग या रखरखाव की वजह से हो सकती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब तक तकनीकी या विशेषज्ञ रिपोर्ट से यह साबित न हो जाए, तब तक उपभोक्ता पर जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। अदालत ने माना कि यह मामला स्पष्ट रूप से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का उदाहरण है।
आदेश में आयोग ने Ola Electric को निर्देश दिया कि वह ₹1,05,729 की राशि (वाहन लागत और आरटीओ शुल्क सहित) 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे, जिसकी गणना 7 फरवरी 2024 से की जाएगी, जब समस्याएं आधिकारिक रूप से दर्ज की गई थीं। इसके अतिरिक्त ₹40,000 मानसिक पीड़ा के लिए और ₹10,000 कानूनी खर्च के रूप में भी देने का आदेश दिया गया है।
यह फैसला इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां बिक्री तेजी से बढ़ रही है लेकिन सर्विस और गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ता शिकायतें भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला कंपनियों के लिए चेतावनी है कि केवल आक्रामक मार्केटिंग और बिक्री पर ध्यान देने के बजाय आफ्टर-सेल्स सर्विस और उत्पाद विश्वसनीयता पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में तकनीकी विफलताओं को हल्के में नहीं लिया जाएगा। आयोग ने अपने फैसले में यह संकेत दिया कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और बार-बार खराबी होने पर पूर्ण रिफंड एक उचित उपाय हो सकता है।
यह मामला भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर के बढ़ते कानूनी और उपभोक्ता दबाव को भी उजागर करता है। जैसे-जैसे इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, वैसे-वैसे गुणवत्ता नियंत्रण और उपभोक्ता संतुष्टि पर कंपनियों की जिम्मेदारी भी और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
