पेरिस। विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) निवेश के नाम पर किए गए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी मामले में फ्रांस की एक अदालत ने वैश्विक भुगतान सेवा कंपनी वर्ल्डपे (Worldpay) को दोषी ठहराया है। पेरिस क्रिमिनल कोर्ट ने कंपनी पर लगभग ₹1.98 करोड़ (करीब €2 लाख) का जुर्माना लगाया है। मामला उन कथित निवेश योजनाओं से जुड़ा है जिनके जरिए हजारों निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर धन जुटाया गया और बाद में रकम को विभिन्न देशों के खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।
अदालत के अनुसार, यह कथित फॉरेक्स निवेश घोटाला वर्ष 2011 से 2014 के बीच संचालित हुआ था। जांच में सामने आया कि निवेशकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और टेलीफोन कॉल के माध्यम से विदेशी मुद्रा बाजार में निवेश के आकर्षक अवसरों का भरोसा दिया गया। उन्हें कम समय में भारी लाभ कमाने के वादे किए गए, लेकिन वास्तविकता में उनकी धनराशि कथित रूप से धोखाधड़ी नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न खातों में भेज दी गई।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वर्ल्डपे ने अपने एक ग्राहक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि डच कंपनी सेरोफ (Seroph) कथित रूप से उन संस्थाओं से जुड़ी हुई थी जो निवेशकों को फर्जी फॉरेक्स योजनाओं में फंसाने का काम कर रही थीं। अदालत ने माना कि वर्ल्डपे ने भुगतान अवसंरचना उपलब्ध कराते समय आवश्यक सतर्कता और अनुपालन मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया।
अदालत ने कंपनी को अवैध भुगतान सेवाएं उपलब्ध कराने में सहयोग का दोषी ठहराते हुए दो अलग-अलग जुर्माने लगाए, जिनकी कुल राशि €2 लाख रही। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग ₹1.98 करोड़ के बराबर बैठती है। न्यायालय ने कहा कि वित्तीय सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी केवल लेनदेन संसाधित करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उन्हें अपने ग्राहकों की गतिविधियों और प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की उचित जांच भी करनी होती है।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ल्डपे ने संबंधित ग्राहक कंपनी को लगभग €1.682 करोड़ की धनराशि स्थानांतरित की थी। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ₹166 करोड़ के बराबर है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी भुगतान नेटवर्क का उपयोग कथित धोखाधड़ी योजनाओं से प्राप्त धन के प्रवाह में किया गया।
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मामले में शामिल मुख्य आरोपियों, जो फ्रांस और इज़राइल से जुड़े बताए गए हैं, को भी अदालत ने दोषी ठहराया है। अदालत ने कुछ आरोपियों को तीन वर्ष तक की कारावास सजा और लगभग ₹3.96 करोड़ (करीब €4 लाख) तक के जुर्माने से दंडित किया है। न्यायालय ने माना कि निवेशकों को सुनियोजित तरीके से गुमराह किया गया और उन्हें ऐसे निवेश अवसरों का भरोसा दिलाया गया जिनका वास्तविक वित्तीय आधार संदिग्ध था।
जांच में सामने आया कि पीड़ितों को मुख्य रूप से इंटरनेट विज्ञापनों, निवेश वेबसाइटों और टेलीफोन संपर्कों के माध्यम से निशाना बनाया गया। उन्हें विश्वास दिलाया गया कि उनका पैसा विदेशी मुद्रा बाजार में निवेश किया जा रहा है और उन्हें उल्लेखनीय लाभ प्राप्त होगा। हालांकि बाद में अधिकांश निवेशकों को न तो वादा किया गया लाभ मिला और न ही उनकी मूल निवेश राशि वापस मिली।
अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस कथित फॉरेक्स घोटाले से निवेशकों को कम से कम €3.5 करोड़ का नुकसान हुआ। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग ₹347 करोड़ से अधिक बैठती है। हालांकि जांच एजेंसियों का मानना है कि वास्तविक नुकसान इससे भी अधिक हो सकता है क्योंकि सभी पीड़ितों की पहचान अभी तक पूरी तरह नहीं हो सकी है।
वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला वैश्विक भुगतान सेवा कंपनियों और फिनटेक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है। बढ़ते डिजिटल वित्तीय लेनदेन के दौर में कंपनियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने ग्राहकों की पहचान, कारोबारी गतिविधियों और संभावित जोखिमों की गहन जांच करें ताकि वित्तीय प्रणालियों का दुरुपयोग रोका जा सके।
यह फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय अनुपालन, एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग उपायों और ग्राहक सत्यापन प्रक्रियाओं को लेकर बढ़ती सख्ती को भी दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वित्तीय संस्थानों पर नियामकीय निगरानी और अधिक मजबूत हो सकती है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां निवेशकों की बड़ी रकम सीमा-पार लेनदेन के माध्यम से स्थानांतरित की जाती है।
