आज के समय में ब्रांडेड फैशन, स्नीकर्स और लग्जरी कपड़ों का क्रेज युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा है। बड़े ब्रांड्स को सिर्फ फैशन नहीं बल्कि स्टेटस सिंबल के रूप में देखा जाने लगा है। लेकिन इसी बढ़ती मांग के बीच नकली उत्पादों का एक विशाल और संगठित नेटवर्क भी समानांतर रूप से फैलता जा रहा है। हाल ही में सामने आई एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने इस पूरे सेक्टर की हकीकत को उजागर कर दिया है, जिसमें कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार स्ट्रीटवियर और लग्जरी सेगमेंट में नकली उत्पादों की हिस्सेदारी चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुकी है। सबसे ज्यादा प्रभावित ब्रांड्स में BAPE जैसे लोकप्रिय स्ट्रीटवियर लेबल शामिल हैं, जिनके 85.19 प्रतिशत उत्पादों में फर्जीवाड़े या संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं। नाइकी के 73.33 प्रतिशत और स्पाइडर ब्रांड के 61.02 प्रतिशत उत्पाद भी जांच में संदिग्ध पाए गए। इसके अलावा स्क्रूटनी वॉल्यूम में नाइकी का हिस्सा 80.5 प्रतिशत और एडिडास का 8.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
लग्जरी फैशन सेगमेंट की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। लुई विटॉन और डियोर जैसे हाई-एंड ब्रांड्स के स्नीकर्स और परिधान में नकली होने का जोखिम 54.1 प्रतिशत तक पाया गया है। वहीं बालेंसीआगा के 36.2 प्रतिशत, क्रिस्टियन लुबुटां के 27.9 प्रतिशत और अलेक्जेंडर मैकक्वीन के 19.2 प्रतिशत उत्पादों में भी फर्जीवाड़े की संभावना दर्ज की गई है। इससे साफ है कि यह समस्या केवल सस्ते या लोकल बाजार तक सीमित नहीं है बल्कि प्रीमियम सेगमेंट भी इसकी चपेट में है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लुई विटॉन, गुच्ची और प्रादा जैसे बड़े लग्जरी ब्रांड नकली उत्पाद बनाने वालों के प्रमुख निशाने पर हैं। कुल जांचे गए सामानों में इन तीन ब्रांड्स की हिस्सेदारी 55.42 प्रतिशत रही है। वहीं मूल्य के आधार पर शनेल 9,095 करोड़ रुपये के साथ सबसे ऊपर रहा, हालांकि इसके भी 5.7 प्रतिशत उत्पाद नकली पाए गए। यह स्थिति वैश्विक फैशन बाजार में बढ़ते खतरे को दर्शाती है।
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कुछ ब्रांड्स ने इस चुनौती के बीच बेहतर नियंत्रण दिखाया है। ऑफ-व्हाइट के 94.49 प्रतिशत और सुप्रीम के 85.03 प्रतिशत उत्पाद असली और मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मजबूत सप्लाई चेन और सख्त गुणवत्ता नियंत्रण नकली उत्पादों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उपभोक्ताओं का भरोसा भी इन्हीं ब्रांड्स पर अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रीटवियर और स्नीकर्स का वैश्विक बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और इसका आकार लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें 16.7 प्रतिशत हिस्सा लग्जरी और प्रीमियम उत्पादों का है। यह सेक्टर हर साल लगभग 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जिससे नकली उत्पादों के लिए भी अवसर बढ़ते जा रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया सेलिंग ने इस समस्या को और जटिल बना दिया है, जहां उपभोक्ता अक्सर असली और नकली में फर्क नहीं कर पाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ते खतरे से बचने के लिए उपभोक्ताओं को केवल अधिकृत स्टोर्स या प्रमाणित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ही खरीदारी करनी चाहिए। साथ ही ब्रांड्स को भी अपनी सप्लाई चेन और ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत करना होगा, ताकि नकली उत्पादों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। यदि यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले समय में यह समस्या वैश्विक फैशन इंडस्ट्री के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
इस बीच बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि नकली उत्पादों के बढ़ते नेटवर्क के पीछे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और डिजिटल मार्केटप्लेस की बड़ी भूमिका है। छोटे शहरों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए नकली सामान तेजी से ग्राहकों तक पहुंच रहा है, जिससे पहचान करना और मुश्किल होता जा रहा है। कई मामलों में पैकेजिंग और ब्रांडिंग इतनी असली जैसी होती है कि आम उपभोक्ता आसानी से धोखा खा जाता है। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है, जिससे इस बढ़ते फर्जीवाड़े पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
