अहमदाबाद। शहर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें 65 वर्षीय रिटायर्ड व्यक्ति को बैंक अधिकारी बनकर ठगों ने ₹8.5 लाख का चूना लगा दिया। ठगों ने फिक्स्ड डिपॉजिट अपडेट और सहायता के बहाने एक संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करवाकर उनके मोबाइल फोन पर नियंत्रण हासिल कर लिया।
पीड़ित, जो अहमदाबाद के वटवा इलाके के निवासी हैं, ने नवंबर 2025 में इस धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि वे अपने ₹4 लाख के फिक्स्ड डिपॉजिट की जानकारी के लिए इंटरनेट पर बैंक का संपर्क नंबर खोज रहे थे, तभी यह ठगी शुरू हुई।
जानकारी के अनुसार, गूगल पर मिले एक नंबर पर कॉल करने के बाद सामने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक का प्रतिनिधि बताया और कॉल को आगे एक अन्य व्यक्ति से जोड़ दिया, जिसने अपना परिचय मुंबई स्थित बैंक के सीनियर मैनेजर ‘आकाश वर्मा’ के रूप में दिया।
इसके बाद ठगों ने पीड़ित से बैंकिंग से जुड़ी निजी जानकारी हासिल कर ली और व्हाट्सएप पर ‘CUSTOMER SUPPORT P15.apk’ नाम की फाइल भेजी। उन्हें यह फाइल “वेरिफिकेशन प्रक्रिया” के नाम पर इंस्टॉल करने को कहा गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस APK फाइल के इंस्टॉल होते ही ठगों को पीड़ित के मोबाइल फोन तक रिमोट एक्सेस मिल गया। इसके बाद बैंकिंग ऐप्स के जरिए अनधिकृत लेनदेन शुरू कर दिए गए और धीरे-धीरे कई फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
ठगों ने कुल ₹8 लाख एक खाते से और ₹50,000 दूसरे खाते से निकाल लिए, जिससे कुल नुकसान ₹8.5 लाख का हुआ। पीड़ित को इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब उन्होंने एटीएम और बैंक स्टेटमेंट की जांच की।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, पहचान छिपाकर ठगी और साइबर अपराध का मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल डाउनलोड न करें और बैंकिंग डिटेल्स फोन, मैसेज या व्हाट्सएप पर साझा न करें। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
इस मामले पर साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे अपराधी तकनीक से ज्यादा “मानवीय मनोविज्ञान” का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया कि ठग भरोसा बनाने के लिए खुद को बैंक अधिकारी या तकनीकी सपोर्ट स्टाफ के रूप में पेश करते हैं और फिर डर या जल्दबाजी पैदा कर पीड़ित से गलत कदम उठवा लेते हैं।
जांचकर्ताओं ने बताया कि ऐसे साइबर अपराधी अब सर्च इंजन पर फर्जी नंबर डालकर, नकली कस्टमर केयर बनाकर और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। एक बार APK इंस्टॉल होने के बाद यह मोबाइल की स्क्रीन को मिरर कर सकता है और OTP सहित कई सुरक्षा सिस्टम को बायपास कर सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के हमले “सोशल इंजीनियरिंग” पर आधारित होते हैं, जिसमें पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह किसी वास्तविक बैंकिंग प्रक्रिया का हिस्सा है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी वित्तीय सेवा के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित हेल्पलाइन नंबर का ही उपयोग किया जाए।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ ऐसे अपराधों में तेजी आई है और अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। जांच एजेंसियां और बैंक मिलकर ऐसे मामलों पर नियंत्रण के प्रयास कर रहे हैं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस ठगी के वित्तीय नेटवर्क और लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों ने आम जनता से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने की अपील की है।
