ANTS सिस्टम में सेंध के बाद लाखों नागरिकों का डेटा लीक, ईमेल-फोन से लेकर जन्मतिथि तक शामिल; साइबर सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर सवाल

“फ्रांस सरकारी एजेंसी डेटा ब्रीच में बड़ा खुलासा: 15 वर्षीय किशोर हिरासत में, 1.2 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड बिक्री की कोशिश”

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By Roopa
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पेरिस। फ्रांस की सरकारी एजेंसी France Titres (ANTS) में हुए बड़े साइबर हमले ने यूरोपीय डिजिटल प्रशासनिक सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में फ्रांसीसी अधिकारियों ने एक 15 वर्षीय किशोर को हिरासत में लिया है, जिस पर आरोप है कि उसने लाखों नागरिकों का संवेदनशील डेटा चोरी कर उसे साइबर अपराधी मंचों पर बेचने की कोशिश की।

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ने ‘breach3d’ नाम से डार्क वेब और साइबर अपराध मंचों पर सक्रिय रहकर लगभग 12 से 18 मिलियन रिकॉर्ड्स की बिक्री की पेशकश की थी। ये डेटा फ्रांस की उस एजेंसी से चुराए गए थे, जो नागरिकों के प्रशासनिक दस्तावेज जारी करने और प्रबंधन का कार्य करती है।

13 अप्रैल को मिली पहली संदिग्ध गतिविधि, 16 अप्रैल को शुरू हुई आधिकारिक जांच

सूत्रों के अनुसार, ANTS ने 13 अप्रैल को अपने नेटवर्क में संदिग्ध गतिविधि दर्ज की थी। इसके बाद 16 अप्रैल को पेरिस अभियोजक कार्यालय को सूचना दी गई, जिसके बाद औपचारिक जांच शुरू हुई।

जांच में सामने आया कि हैकर ने सिस्टम में घुसपैठ कर बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत डेटा एक्सफिल्ट्रेट किया। इसमें नाम, ईमेल एड्रेस, जन्मतिथि, फोन नंबर और पते जैसी संवेदनशील जानकारी शामिल थी।

1.17 करोड़ खातों पर असर, एजेंसी ने किया दावा

ANTS ने बाद में आधिकारिक बयान में कहा कि इस साइबर हमले में करीब 1.17 करोड़ (11.7 मिलियन) खातों पर प्रभाव पड़ा है। हालांकि एजेंसी ने यह भी दावा किया कि चोरी किया गया डेटा सीधे तौर पर खातों में अनधिकृत लॉगिन के लिए उपयोग योग्य नहीं था।

इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत डेटा का लीक होना भविष्य में पहचान चोरी (Identity Theft), फिशिंग और साइबर फ्रॉड के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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किशोर पर गंभीर आरोप, 7 साल तक की सजा का प्रावधान

फ्रांसीसी अभियोजन कार्यालय के अनुसार, हिरासत में लिया गया 15 वर्षीय किशोर पर अनधिकृत एक्सेस, डेटा चोरी, और सरकारी सिस्टम में घुसपैठ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा उस पर ऐसे सॉफ्टवेयर रखने का भी आरोप है, जिनका उपयोग साइबर अपराध में किया जाता है।

इन आरोपों में अधिकतम सात साल की जेल और लगभग 3 लाख यूरो (करीब ₹2.7 करोड़) तक जुर्माने का प्रावधान है। फिलहाल मामला जांच न्यायाधीश के अधीन है और किशोर को न्यायिक निगरानी में रखने की सिफारिश की गई है।

साइबर विशेषज्ञों की चेतावनी: नाबालिगों की बढ़ती भागीदारी चिंताजनक

इस मामले पर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। एक प्रसिद्ध साइबर विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि डिजिटल दुनिया में नाबालिगों की बढ़ती भागीदारी एक गंभीर संकेत है।

उन्होंने कहा, “आज के साइबर अपराधी अक्सर सोशल इंजीनियरिंग, टेलीग्राम चैनल्स और डार्क वेब फोरम्स के जरिए युवाओं को आकर्षित करते हैं। तकनीकी कौशल रखने वाले नाबालिग कई बार यह समझ ही नहीं पाते कि वे किस कानूनी जोखिम में प्रवेश कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति भविष्य में और अधिक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क को जन्म दे सकती है।”

डिजिटल सुरक्षा पर बड़ा सवाल

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सरकारी डिजिटल सिस्टम भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तकनीकी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि निरंतर मॉनिटरिंग, एथिकल हैकिंग टेस्टिंग और डेटा एन्क्रिप्शन को और मजबूत करना अब समय की जरूरत बन गया है।

फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में डेटा सिस्टम से बाहर कैसे गया और क्या इसमें कोई आंतरिक सुरक्षा चूक भी शामिल थी।

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