WhatsApp विज्ञापन से शुरू हुआ साइबर ट्रैप, किश्तों में कराई गई ट्रांजैक्शन; पैसे निकालने पर और निवेश का दबाव डालते रहे ठग

“Work From Home का जाल: लखनऊ में महिला से ₹4.98 लाख की ठगी, Telegram टास्क के नाम पर फंसाया”

Roopa
By Roopa
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘Work From Home’ के नाम पर साइबर ठगी का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक महिला को ऑनलाइन नौकरी का झांसा देकर ₹4.98 लाख की ठगी कर ली गई। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि कैसे सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए साइबर अपराधी आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।

मामला सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र का है, जहां गोमतीनगर एक्सटेंशन निवासी पीड़िता श्रुति भोला ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि मार्च 2025 में उन्हें WhatsApp पर ‘Work From Home’ से जुड़ा एक आकर्षक विज्ञापन दिखाई दिया, जिस पर क्लिक करने के बाद उनकी ठगों से बातचीत शुरू हुई।

शुरुआत में ठगों ने खुद को एक प्रोफेशनल कंपनी का प्रतिनिधि बताया और आसान ऑनलाइन टास्क के बदले अच्छे कमीशन का लालच दिया। इसके बाद पीड़िता को एक Telegram लिंक भेजा गया, जिसके जरिए उन्हें ‘Global Financial & Economics Group Task Group’ नाम के एक ग्रुप में जोड़ लिया गया। यहीं से ठगी का पूरा खेल शुरू हुआ।

ग्रुप में शामिल होने के बाद पीड़िता को छोटे-छोटे टास्क दिए गए, जैसे रेटिंग देना, क्लिक करना या कुछ डिजिटल गतिविधियां पूरी करना। शुरुआती कुछ टास्क पूरे करने पर उन्हें मामूली रकम भी दी गई, जिससे उनका भरोसा बढ़ता गया। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए ठगों ने उन्हें “प्रीमियम टास्क” के नाम पर निवेश करने के लिए प्रेरित किया।

शुरुआत में छोटी रकम जमा कराई गई, लेकिन धीरे-धीरे निवेश की राशि बढ़ाई जाती गई। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़िता ने अलग-अलग तिथियों में कुल ₹4,98,000 ट्रांसफर किए। 17 मार्च 2025 को उन्होंने UPI के जरिए रकम भेजी, जबकि उसी दिन ₹50,000 NEFT और ₹10,000 IMPS के माध्यम से भी ट्रांसफर किए गए। इसके बाद 7 अप्रैल 2025 को RTGS के जरिए ₹3,00,000 की बड़ी राशि भेजी गई।

ठगों ने हर ट्रांजैक्शन के बाद यह भरोसा दिलाया कि उन्हें जल्द ही बड़ा मुनाफा मिलेगा और उनका अकाउंट बैलेंस लगातार बढ़ रहा है। लेकिन जब पीड़िता ने अपनी जमा रकम निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने उन्हें और अधिक निवेश करने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया।

यहीं पर उन्हें शक हुआ और समझ में आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और पूरी घटना की जानकारी दी। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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जांचकर्ताओं के अनुसार, इस तरह के मामलों में साइबर अपराधी पहले भरोसा जीतने के लिए छोटी रकम वापस करते हैं और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करवाते हैं। Telegram और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर वे अपनी पहचान छुपाते हैं और फर्जी कंपनियों के नाम पर लोगों को गुमराह करते हैं।

Future Crime Research Foundation से जुड़े एक विशेषज्ञ के मुताबिक, “Work From Home और ऑनलाइन टास्क आधारित स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर लोगों को पहले भरोसे में लिया जाता है और फिर उन्हें लगातार निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता है। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास होता है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ा खतरा यह है कि ये स्कैम पूरी तरह डिजिटल होते हैं, जिससे ठगों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। फर्जी बैंक खाते, वर्चुअल नंबर और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के जरिए वे अपनी पहचान छुपाए रखते हैं।

पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी ‘Work From Home’ या ऑनलाइन कमाई के ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें, खासकर जब उसमें निवेश की मांग की जा रही हो। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और अनजान Telegram या WhatsApp ग्रुप्स में शामिल होने से पहले पूरी जांच करें।

फिलहाल पुलिस इस मामले में शामिल बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह का काम हो सकता है, जो इसी तरह कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस नेटवर्क से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है। इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है और थोड़ी सी लापरवाही भारी आर्थिक नुकसान में बदल सकती है।

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