अहमदाबाद में साइबर अपराध की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें CSC सेंटर से जुड़े कर्मचारियों की मिलीभगत से आधार कार्ड से जुड़ी जानकारियों में हेरफेर कर 240 लोगों के मोबाइल नंबर बदल दिए गए और बैंकिंग डेटा तक पहुंच बनाई गई। इस पूरे मामले में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक और सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर बदलने का काम किया। इसमें तीन आरोपी सरकारी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से जुड़े हुए थे, जो आधार अपडेट और अन्य डिजिटल सेवाएं प्रदान करते हैं।
मोबाइल नंबर बदलने के बाद आरोपियों ने नए नंबर पर भेजे गए OTP के जरिए DigiLocker खाते तक पहुंच बनाई और वहां से बैंक खातों, ईमेल और अन्य निजी डेटा को एक्सेस किया। इस डेटा का इस्तेमाल कर वे वित्तीय धोखाधड़ी की कोशिशों में जुट गए।
हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने बड़े पैमाने पर लोन लेने की कोशिश की, लेकिन अधिकतर आवेदन अस्वीकृत हो गए। इस दौरान केवल लगभग ₹26 हजार का एक छोटा लोन ही सफल हो सका।
साइबर अपराध से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि आधार कार्ड में किसी भी बदलाव को रोकने के लिए mAadhaar ऐप में बायोमेट्रिक लॉक की सुविधा दी गई है। यदि उपयोगकर्ता इसे सक्रिय कर लेते हैं, तो बिना अनुमति कोई भी बदलाव संभव नहीं होता।
इस मामले में मुख्य आरोपी कनुभाई के पास एक CSC सेंटर का संचालन था, जहां से यह पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। अन्य तीन आरोपी भी इसी सिस्टम से जुड़े हुए पाए गए हैं।
पुलिस जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क ने एक साल के भीतर 240 लोगों के आधार से जुड़े मोबाइल नंबर बदलकर डिजिटल पहचान प्रणाली का दुरुपयोग किया है। इस तरह की घटनाओं ने देश में डिजिटल सुरक्षा और आधार डेटा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
जांचकर्ताओं के अनुसार यह पूरा खेल बेहद संगठित तरीके से चलाया जा रहा था। CSC सेंटर में आने वाले आधार अपडेट अनुरोधों के दौरान आरोपी पुराने मोबाइल नंबरों को सिस्टम से हटाकर नए नंबर दर्ज कर देते थे। इसके बाद ओटीपी वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को गलत तरीके से पूरा कर खातों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते थे। इसके बाद DigiLocker, बैंकिंग ऐप्स और ईमेल सेवाओं तक पहुंच बनाकर व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग किया जाता था।
पीड़ितों को इस धोखाधड़ी का पता तब चलता था जब उनके बैंक खातों या DigiLocker में असामान्य गतिविधियां देखने को मिलती थीं या वे अपने पुराने मोबाइल नंबर से लॉगिन नहीं कर पाते थे। कई मामलों में लोग अपने खाते से जुड़ी जानकारी खो बैठे, जिससे वित्तीय जोखिम बढ़ गया।
अधिकारियों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबर को नियमित रूप से जांचते रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करें। इसके साथ ही बायोमेट्रिक लॉक और OTP सुरक्षा को सक्रिय रखने पर जोर दिया गया है ताकि ऐसे साइबर फ्रॉड से बचाव किया जा सके।
फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित ठगी के मामलों की गहराई से जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।
यह मामला देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और आधार आधारित सेवाओं के दुरुपयोग की गंभीर तस्वीर पेश करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे सरकारी सेवाएं डिजिटल हो रही हैं, वैसे-वैसे साइबर अपराधी भी नई तकनीकों का उपयोग कर सिस्टम की कमजोरियों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में मजबूत सुरक्षा उपायों और जागरूकता को बेहद जरूरी बताया जा रहा है।
जांच आगे जारी है और साइबर सुरक्षा पर विशेष निगरानी बढ़ाई गई है।
