अहमदाबाद में म्यूल अकाउंट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें किराये के बैंक खातों से साइबर ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा रहा था।

अहमदाबाद में म्यूल अकाउंट रैकेट का भंडाफोड़: 55 साइबर शिकायतों से जुड़ा नेटवर्क उजागर, दो गिरफ्तार

Team The420
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Ahmedabad। साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर में पुलिस ने एक संगठित म्यूल अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो अवैध वित्तीय लेनदेन को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। कांकड़िया इलाके में की गई इस कार्रवाई ने एक ऐसे नेटवर्क को उजागर किया है, जो दर्जनों साइबर अपराध मामलों से जुड़ा हुआ था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा रैकेट “म्यूल अकाउंट” के इस्तेमाल पर आधारित था—यानी ऐसे बैंक खाते, जिन्हें किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर खोलकर या संचालित कर अवैध धन को ट्रांसफर करने के लिए उपयोग किया जाता है। जांच के दौरान सामने आया कि एक ही निजी बैंक खाते से जुड़े करीब 55 साइबर अपराधों की शिकायतें दर्ज थीं। इससे इस नेटवर्क के व्यापक पैमाने पर काम करने के संकेत मिले हैं।

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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जिगर जाला और उमंग गोवाणी के रूप में हुई है। जिगर जाला, जो सारंगपुर इलाके का निवासी है, कथित तौर पर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और इसी का फायदा उठाकर उसे इस नेटवर्क में शामिल किया गया। वहीं उमंग गोवाणी, जो एक निजी बैंक में कार्यरत था, ने अपने पेशेवर पहुंच का इस्तेमाल करते हुए खातों के संचालन और लेनदेन में अहम भूमिका निभाई।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी विभिन्न धोखाधड़ी के जरिए लोगों से पैसा इकट्ठा करते थे और उसे इन म्यूल खातों में जमा करते थे। इसके बाद रकम को तेजी से कई खातों में ट्रांसफर कर उसकी असली पहचान छुपाई जाती थी। अंत में इस पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था, जिससे ट्रैक करना और भी मुश्किल हो जाता था।

क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल इस बात की ओर इशारा करता है कि साइबर अपराधी अब आधुनिक तकनीकों का सहारा लेकर अपनी गतिविधियों को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। डिजिटल करेंसी में रूपांतरण के जरिए वे पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम की निगरानी से बचने और लेनदेन को गुमनाम बनाने का प्रयास करते हैं।

इस मामले में एक तीसरे आरोपी मुकीम की भूमिका भी सामने आई है, जिसकी तलाश जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा गिरोह आपसी तालमेल से काम कर रहा था, जिसमें हर सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी तय थी—खाते उपलब्ध कराना, पैसा इकट्ठा करना, ट्रांसफर करना और अंत में उसे क्रिप्टो में बदलना।

अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी अक्सर लोगों के बैंक खातों को किराये पर लेते थे और इसके बदले उन्हें कमीशन देते थे। इन खातों का इस्तेमाल बड़ी रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था, जो ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग और निवेश घोटालों से हासिल की जाती थी। कई खातों के इस्तेमाल से यह नेटवर्क लंबे समय तक पकड़ में नहीं आ पाया।

पुलिस ने यह कार्रवाई एक सुनियोजित जांच के बाद की, जिसमें संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखी गई और विभिन्न शिकायतों को जोड़कर एक पैटर्न तैयार किया गया। इसके बाद टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और अहम डिजिटल साक्ष्य जब्त किए, जिनकी जांच जारी है।

अब जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के पूरे विस्तार को खंगालने में जुटी हैं। अन्य जुड़े खातों, लाभार्थियों और संभावित अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी पड़ताल की जा रही है। कॉल डिटेल्स, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा के आधार पर पूरे नेटवर्क का नक्शा तैयार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूल अकाउंट रैकेट आधुनिक साइबर अपराध का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। यह नेटवर्क अपराधियों को असली अपराध से दूर रखते हैं, जिससे जांच और कार्रवाई चुनौतीपूर्ण हो जाती है। वहीं क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल इस चुनौती को और बढ़ा देता है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खातों की जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी भी संदिग्ध लेनदेन की तुरंत सूचना दें। जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे अपराधों को रोकने में सबसे प्रभावी उपाय मानी जा रही है।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल युग में वित्तीय अपराध कितनी तेजी से रूप बदल रहे हैं और उनसे निपटने के लिए मजबूत निगरानी और तकनीकी क्षमता की जरूरत है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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