राजकोट। Rajkot में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक जीएसटी अधिकारी और एक निजी टैक्स कंसल्टेंट को ₹20 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन के तहत की गई, जिसमें आरोपी अधिकारियों को उसी समय दबोच लिया गया जब वे कथित तौर पर नकद रकम स्वीकार कर रहे थे।
जांच में सामने आया है कि आरोपी जीएसटी अधिकारी, जो सेंट्रल जीएसटी (CGST) विभाग में सुपरिंटेंडेंट के पद पर तैनात था, एक कारोबारी के खिलाफ चल रही टैक्स जांच को खत्म करने के बदले भारी रिश्वत की मांग कर रहा था। आरोप है कि शुरुआत में ₹25 लाख की मांग की गई थी, जिसे बाद में ₹20 लाख पर तय किया गया। इस पूरे लेन-देन में एक निजी टैक्स कंसल्टेंट को बिचौलिये के रूप में इस्तेमाल किया गया।
सूत्रों के अनुसार, पीड़ित ने इस अवैध मांग को मानने से इनकार करते हुए इसकी शिकायत एसीबी से की। शिकायत की पुष्टि के बाद अधिकारियों ने पूरी योजना के साथ जाल बिछाया। 28 अप्रैल 2026 को तय स्थान पर ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, जहां आरोपी पक्ष रकम लेने के लिए मौजूद था।
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कार्रवाई के दौरान एसीबी टीम ने मौके से पूरी ₹20 लाख की नकद राशि बरामद की और दोनों आरोपियों को तत्काल हिरासत में ले लिया। यह ऑपरेशन इतनी सटीकता से अंजाम दिया गया कि आरोपियों को किसी तरह का बचाव या भागने का मौका नहीं मिला। प्रारंभिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि कंसल्टेंट ही रकम लेने और पहुंचाने की कड़ी बना हुआ था।
बताया जा रहा है कि जिस मामले को दबाने के लिए रिश्वत मांगी जा रही थी, वह जीएसटी चोरी और फर्जी बिलिंग से जुड़ा हुआ था। ऐसे मामलों में आमतौर पर भारी वित्तीय अनियमितताएं होती हैं और कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी पक्ष पर दबाव बनाया जाता है। इसी का फायदा उठाते हुए आरोपी अधिकारी ने कथित तौर पर अवैध लाभ लेने की कोशिश की।
इस गिरफ्तारी के बाद विभागीय हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक व्यापक नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या आरोपी पहले भी इसी तरह के मामलों में शामिल रहा है और क्या अन्य लोग भी इस रैकेट का हिस्सा हैं।
एसीबी द्वारा दर्ज मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जाएगी, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, टैक्स प्रशासन से जुड़े मामलों में इस तरह की रिश्वतखोरी न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि ईमानदार करदाताओं के साथ भी अन्याय करती है। यदि ऐसे मामलों पर सख्ती से कार्रवाई नहीं की जाए, तो यह व्यवस्था में अविश्वास को बढ़ावा दे सकती है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या संवेदनशील विभागों में निगरानी तंत्र पर्याप्त रूप से मजबूत है। साथ ही, यह भी स्पष्ट करती है कि जागरूक नागरिक और सक्रिय शिकायत प्रणाली भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसियों ने संकेत दिया है कि यदि इस केस में अन्य किसी की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
