नई दिल्ली। देश में टैक्स अनुपालन को और सख्त और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए नए Income Tax Rules 2026 ने आम लोगों से लेकर निवेशकों तक के लिए बड़े बदलाव ला दिए हैं। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी इन नियमों के तहत अब कई उच्च-मूल्य (High Value) लेनदेन बिना PAN के करना संभव नहीं होगा। खास बात यह है कि पहले जिन मामलों में Form 60 का इस्तेमाल किया जाता था, उसकी जगह लाए गए Form 97 का उपयोग अब बेहद सीमित कर दिया गया है।
नए नियमों का सीधा संदेश है—“No PAN, No Purchase।” यानी अगर आपके पास Permanent Account Number (PAN) नहीं है, तो कई तरह की खरीदारी और निवेश गतिविधियों पर रोक लग सकती है। सरकार का मानना है कि इससे नकद लेनदेन और कर चोरी पर अंकुश लगेगा।
₹2 लाख से ऊपर की खरीदारी में PAN जरूरी
नियमों के मुताबिक, ₹2 लाख से अधिक के किसी भी सामान या सेवा की खरीदारी के लिए PAN देना अनिवार्य होगा। इसमें सोना, महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स, लग्जरी आइटम्स जैसे उत्पाद शामिल हैं। यानी अगर कोई व्यक्ति ₹2 लाख से ज्यादा का गोल्ड ज्वेलरी खरीदता है, तो उसे PAN देना ही होगा—चाहे भुगतान कैश में हो या डिजिटल माध्यम से।
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टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रावधान पहले भी मौजूद था, लेकिन अब इसकी निगरानी और सख्ती बढ़ा दी गई है। इसका उद्देश्य बड़े लेनदेन की ट्रैकिंग को मजबूत करना और अनियमित नकदी प्रवाह को रोकना है।
इन लेनदेन में अब Form 97 भी नहीं चलेगा
नए नियमों के तहत कुछ ऐसे महत्वपूर्ण लेनदेन हैं, जहां अब Form 97 का विकल्प भी खत्म कर दिया गया है और सीधे PAN अनिवार्य कर दिया गया है। इनमें शामिल हैं:
- ₹5 लाख से अधिक कीमत वाले मोटर वाहन की खरीद
- क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन
- डिमैट अकाउंट खोलना
- ₹50,000 से अधिक का म्यूचुअल फंड, बॉन्ड या डिबेंचर निवेश
- ₹10 लाख से अधिक के कैश डिपॉजिट या निकासी
- ₹1 लाख से अधिक के सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन
- अनलिस्टेड शेयरों की खरीद-बिक्री
इन सभी मामलों में अब बिना PAN के कोई भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकेगी, जिससे वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद है।
Form 97 का दायरा क्यों घटाया गया
सरकार के मुताबिक, पहले हर साल करीब 12.5 करोड़ Form 60 फाइल होते थे, जिन्हें अब Form 97 और 98 से रिप्लेस किया गया है। लेकिन नए सिस्टम में इनकी जरूरत काफी कम कर दी गई है। अनुमान है कि अब यह संख्या घटकर करीब 2 करोड़ रह जाएगी।
इस बदलाव के पीछे सरकार की रणनीति साफ है—ज्यादातर लेनदेन को PAN-आधारित बनाना ताकि हर वित्तीय गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सके। इससे टैक्स प्रशासन को डेटा एनालिटिक्स के जरिए संदिग्ध लेनदेन पकड़ने में मदद मिलेगी।
कुछ लेनदेन को रिपोर्टिंग से हटाया गया
हालांकि, नियमों में कुछ राहत भी दी गई है। कुछ सामान्य और कम जोखिम वाले लेनदेन को Form 97 के दायरे से बाहर कर दिया गया है। इनमें शामिल हैं:
- विदेशी मुद्रा की खरीद
- बैंक ड्राफ्ट, पे ऑर्डर या बैंकर्स चेक की नकद खरीद
- प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) से जुड़े लेनदेन
सरकार का मानना है कि इससे छोटे और नियमित लेनदेन करने वाले लोगों पर अनावश्यक बोझ कम होगा।
क्या होगा आम लोगों पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इन नए नियमों का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो अब तक बिना PAN के बड़े लेनदेन करते थे। अब उन्हें या तो PAN बनवाना होगा या फिर ऐसे लेनदेन से दूर रहना होगा।
इसके अलावा, निवेशकों और वित्तीय सेवाओं का उपयोग करने वालों के लिए भी PAN एक अनिवार्य दस्तावेज बन चुका है। बैंकिंग, निवेश और क्रेडिट से जुड़े लगभग सभी बड़े फैसलों में अब PAN की भूमिका केंद्रीय हो गई है।
पारदर्शिता और डिजिटल ट्रैकिंग पर जोर
सरकार का उद्देश्य साफ है—टैक्स बेस बढ़ाना, नकद लेनदेन को कम करना और वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना। Income Tax Department का मानना है कि PAN आधारित सिस्टम से टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी और राजस्व संग्रह में सुधार होगा।
कुल मिलाकर, नए टैक्स नियम यह संकेत देते हैं कि भारत तेजी से एक पूरी तरह डिजिटल और ट्रैक योग्य वित्तीय प्रणाली की ओर बढ़ रहा है, जहां हर बड़े लेनदेन की निगरानी संभव होगी।
