बरेली में फर्जी ‘मैडम कलेक्टर’ बनकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये ठगने वाले गिरोह का खुलासा हुआ।

फर्जी ‘मैडम कलेक्टर’ का खेल: UPSC में असफलता के बाद रचा IAS बनने का नाटक, ₹55 लाख, लग्जरी SUV और नकली रुतबे से ठगी

Team The420
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बरेली। उत्तर प्रदेश के Bareilly से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने आईएएस बनने के सपने के टूटने के बाद खुद को ही अफसर घोषित कर दिया और उसी पहचान के सहारे ठगी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। इस ‘फर्जी मैडम कलेक्टर’ ने न सिर्फ लग्जरी लाइफस्टाइल अपनाई, बल्कि सरकारी सिस्टम जैसी छवि बनाकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये ऐंठ लिए।

जांच में सामने आया कि आरोपी युवती ने करीब आठ साल तक सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने खुद को पहले एसडीएम और फिर एडीएम स्तर का अधिकारी बताना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसने अपने आसपास ऐसा प्रभाव बना लिया कि लोग बिना किसी सत्यापन के उसे असली अफसर मानने लगे।

उसकी एंट्री और व्यवहार पूरी तरह किसी वरिष्ठ अधिकारी जैसा होता था—महंगी लग्जरी SUV, गाड़ी पर प्रशासनिक पद का संकेत, आत्मविश्वास से भरी बातचीत और अधिकारपूर्ण बॉडी लैंग्वेज। यही बाहरी छवि उसकी सबसे बड़ी ताकत बनी, जिससे वह लोगों का भरोसा आसानी से जीत लेती थी।

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आरोपी ने खासतौर पर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया। वह उनसे संपर्क बनाकर सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देती और फिर चरणबद्ध तरीके से पैसे वसूलती। ठगी को असली रूप देने के लिए उसने फर्जी नियुक्ति पत्र भी तैयार किए, जिनमें शासन स्तर के अधिकारियों के नाम और पद का इस्तेमाल किया गया।

इतना ही नहीं, भरोसा मजबूत करने के लिए एक पीड़ित के खाते में ₹17,000 ‘वेतन’ के रूप में ट्रांसफर किए गए, जिससे उसे यकीन हो गया कि उसकी नौकरी लग चुकी है। इसके बाद पीड़ितों ने बिना शक किए लाखों रुपये दे दिए। एक मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने के नाम पर ₹5.21 लाख तक वसूले गए।

ठगी का यह खेल लंबे समय तक चलता रहा, लेकिन जब पीड़ितों को तय समय पर जॉइनिंग नहीं मिली और उन्होंने सत्यापन किया, तब पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू हुई और आरोपी युवती के साथ उसकी बहनों को भी हिरासत में लिया गया।

जांच एजेंसियों को कार्रवाई के दौरान कई चौंकाने वाले सबूत मिले हैं। आरोपियों के पास से एक लग्जरी SUV बरामद हुई, जिस पर प्रशासनिक पद का संकेत लिखा हुआ था। इसके अलावा 10 से अधिक चेकबुक, दो लैपटॉप, कई मोबाइल फोन और विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब ₹55 लाख का पता चला। इन खातों को तत्काल फ्रीज कर दिया गया है। मौके से करीब ₹4.5 लाख नकद भी बरामद हुए हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क परिवार के स्तर पर संचालित हो रहा था। आरोपी युवती की बहनें और एक अन्य रिश्तेदार भी इस ठगी में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। सभी मिलकर संभावित शिकार की पहचान करते, भरोसा बनाते और फिर पैसों की वसूली करते थे।

अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल कुछ पीड़ितों तक सीमित नहीं है। आशंका है कि इस गिरोह ने कई अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया है, जो अभी सामने नहीं आए हैं। जांच एजेंसियां अब डिजिटल ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल्स और बैंकिंग रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में ठग मनोवैज्ञानिक रणनीति का इस्तेमाल करते हैं। वे लोगों की आकांक्षाओं—खासतौर पर सरकारी नौकरी पाने की इच्छा—को निशाना बनाते हैं और जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाते हैं। यही वजह है कि पीड़ित अक्सर बिना जांच-पड़ताल के बड़ी रकम सौंप देते हैं।

फिलहाल आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि कैसे फर्जी पहचान और दिखावटी रुतबा लोगों के भरोसे का फायदा उठाकर बड़े आर्थिक अपराध को अंजाम दे सकते हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी नौकरी या सरकारी संपर्क के दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूर करें और बिना सत्यापन के पैसे देने से बचें।

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