पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में पूर्व पंजाब पुलिस DIG हर्चरण सिंह भुल्लर से जुड़े कथित नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई करते हुए 11 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित अवैध संपत्ति, बेनामी निवेश और अपराध से अर्जित धन (proceeds of crime) की जांच के तहत की गई है। एजेंसी का उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, संपत्ति की वास्तविक स्वामित्व संरचना और धन के स्रोतों की विस्तृत जांच करना बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ED की टीमों ने दिल्ली से आए अधिकारियों और जालंधर यूनिट के सहयोग से यह समन्वित कार्रवाई की। छापेमारी का दायरा काफी व्यापक रहा, जिसमें चंडीगढ़ के दो स्थान—जिनमें सेक्टर 40 स्थित आवास शामिल है—लुधियाना के पांच ठिकाने, पटियाला के दो और नाभा व जालंधर का एक-एक स्थान शामिल रहा। इन सभी स्थानों को भुल्लर और उनके कथित सहयोगियों से जुड़ी संपत्तियों और वित्तीय नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।
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यह मामला तब और गंभीर हो गया जब पिछले वर्ष केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भुल्लर को एक स्क्रैप व्यापारी की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक लंबित मामले को निपटाने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी, जिसमें एक मध्यस्थ की भूमिका भी सामने आई थी। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ते हुए कथित अवैध संपत्तियों और आय से अधिक संपत्ति के मामलों तक पहुंच गया।
CBI जांच के दौरान पहले ही कई अहम बरामदगियां सामने आ चुकी थीं। चंडीगढ़ स्थित आवास से ₹7.36 करोड़ नकद, लगभग ₹2.32 करोड़ मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण और 26 लग्जरी घड़ियां बरामद की गई थीं। इन बड़ी बरामदगियों ने मामले को गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में ला दिया, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से अलग जांच शुरू की।
ED की मौजूदा कार्रवाई का मुख्य फोकस इस बात पर है कि बरामद संपत्तियों और संदिग्ध निवेशों का वास्तविक स्रोत क्या था और क्या इन्हें वैध आय दिखाने के लिए अलग-अलग नामों और संस्थाओं के जरिए छुपाया गया था। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन संपत्तियों को बेनामी संरचनाओं के माध्यम से नियंत्रित किया जा रहा था। इसके लिए बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्ति रजिस्ट्रेशन दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत की जा रही है, जिसके तहत अपराध से अर्जित संपत्ति को ट्रैक करना, फ्रीज करना और बाद में जब्त करना शामिल है। जांच टीमें डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कर रही हैं ताकि धन के प्रवाह की पूरी श्रृंखला को समझा जा सके।
सूत्रों का कहना है कि जांच में कई ऐसे लिंक सामने आए हैं जो संकेत देते हैं कि यह केवल व्यक्तिगत स्तर का मामला नहीं है, बल्कि इसमें एक व्यापक और संगठित वित्तीय नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। हालांकि, एजेंसियां अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं और पूरे मामले को विभिन्न एंगल से जांचा जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद पंजाब के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। कई संपत्तियों की वैधता और स्वामित्व संरचना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि क्या इन संपत्तियों को अलग-अलग नामों और संस्थाओं के जरिए छुपाने का प्रयास किया गया था।
ED की टीमें अभी भी कई दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच में जुटी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरे नेटवर्क की वित्तीय कड़ियां पूरी तरह से जोड़ नहीं ली जातीं, तब तक इस मामले की वास्तविक व्यापकता स्पष्ट नहीं हो सकेगी।
