नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में चीनी सप्लाई के नाम पर एक बड़े आर्थिक धोखाधड़ी के मामले ने व्यापारिक समुदाय को हिला दिया है। एक स्थानीय व्यापारी से कथित रूप से ₹2.62 करोड़ की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है, जिसमें पांच व्यापारियों पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है। यह पूरा मामला पुराने व्यापारिक विश्वास को आधार बनाकर बड़े स्तर पर की गई वित्तीय हेराफेरी से जुड़ा बताया जा रहा है।
पुराने व्यापारिक संबंधों से बना भरोसे का आधार
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता विजय भगवंदास झमतानी, जो कपालतारू कॉलोनी, कामठी के निवासी हैं, “विजय भवेश सेल्स” नाम से कन्फेक्शनरी और शुगर ट्रेडिंग का व्यवसाय संचालित करते हैं। वे लंबे समय से आरोपित व्यापारियों से चीनी की खरीद-फरोख्त कर रहे थे, जिससे उनके बीच व्यापारिक विश्वास का माहौल बन गया था।
इसी भरोसे का लाभ उठाकर आरोपित व्यापारियों ने शुरुआत में समय पर चीनी की सप्लाई की, जिससे लेन-देन सुचारु रूप से चलता रहा। इसके बाद शिकायतकर्ता ने व्यापार का दायरा बढ़ा दिया और बड़ी मात्रा में ऑर्डर देना शुरू किया। यही वह मोड़ था, जहां से कथित धोखाधड़ी की शुरुआत हुई।
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₹2.62 करोड़ भुगतान के बाद भी नहीं मिली चीनी
शिकायत के अनुसार, 21 अक्टूबर 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच झमतानी ने विभिन्न किस्तों में कुल ₹2.62 करोड़ की राशि आरोपित व्यापारियों को ट्रांसफर की, लेकिन इसके बाद तय मात्रा में चीनी की सप्लाई नहीं की गई। कई बार संपर्क करने पर आरोपितों ने अलग-अलग बहाने बनाकर समय टालना शुरू कर दिया और अंततः न तो माल दिया और न ही रकम वापस की गई।
व्यापारिक लेन-देन में लगातार अनिश्चितता बढ़ने के बाद शिकायतकर्ता को संदेह हुआ और उन्होंने पूरी स्थिति की जांच की। जब स्पष्ट हुआ कि यह केवल देरी नहीं बल्कि सुनियोजित धोखाधड़ी हो सकती है, तब उन्होंने मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई।
पुणे, सांगली और सोलापुर से जुड़े पांच व्यापारियों पर केस
पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद पांच व्यापारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। ये सभी आरोपी पुणे, सांगली और सोलापुर से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक आरोपियों की विस्तृत भूमिका और उनके नेटवर्क की गहराई की जांच जारी है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला केवल एक सामान्य व्यापारिक विवाद नहीं बल्कि सुनियोजित आर्थिक धोखाधड़ी की ओर संकेत करता है। शुरुआती चरण में जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या आरोपितों ने पहले से ही विश्वास अर्जित करने की रणनीति अपनाई थी ताकि बाद में बड़ी रकम हासिल की जा सके।
बैंक खातों और व्यापारिक दस्तावेजों की जांच
मामले में यह भी देखा जा रहा है कि क्या आरोपितों ने अलग-अलग बैंक खातों और व्यापारिक माध्यमों का उपयोग कर धन को इधर-उधर किया और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। बैंकिंग ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और व्यापारिक दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
स्थानीय व्यापारिक समुदाय में इस घटना के बाद चिंता का माहौल है। कई व्यापारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं भरोसे पर आधारित व्यापार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती हैं और बड़े लेन-देन में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत को उजागर करती हैं।
वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला खंगाल रही पुलिस
फिलहाल पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला सामने आ सकती है। जांच अधिकारियों के अनुसार, जैसे-जैसे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सामने आएंगे, इस धोखाधड़ी की वास्तविक परतें खुलती जाएंगी और पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
