केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल अरेस्ट स्कैम रोकने के लिए बायोमेट्रिक SIM वेरिफिकेशन, संदिग्ध बैंक खातों पर डेबिट होल्ड और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही जैसे सख्त उपायों वाली रिपोर्ट पेश की है।

हिसार में बड़ा साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़: फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश घोटाले में 6 गिरफ्तार, ₹29 लाख की ठगी का खुलासा

Team The420
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हिसार:   हरियाणा के हिसार में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह कथित तौर पर फर्जी शेयर बाजार निवेश योजनाओं के जरिए लोगों से ठगी कर रहा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं, जिससे जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।

व्हाट्सऐप ग्रुप से निवेशकों को बनाया गया निशाना

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर व्हाट्सऐप के जरिए लोगों को निशाना बनाता था। आरोप है कि यह लोग निवेशकों को भारी मुनाफे का लालच देकर व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ते थे और फिर उन्हें फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाते थे, जिसमें नकली मुनाफा दिखाया जाता था।

यह मामला तब सामने आया जब बरवाला निवासी तरुण सिंगला ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनसे करीब ₹29 लाख की ठगी की गई है। शिकायत के अनुसार, उन्हें अनजान लोगों ने एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा, जहां खुद को वित्तीय सलाहकार बताने वाले लोग शेयर बाजार में निवेश करने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

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नकली मुनाफा दिखाकर बढ़ाया गया भरोसा

शुरुआत में इस फर्जी एप्लिकेशन में निवेश पर बढ़ा-चढ़ाकर मुनाफा दिखाया गया, जिससे पीड़ितों का भरोसा बढ़ गया। इसी भरोसे के आधार पर तरुण सिंगला और अन्य लोगों ने बड़ी रकम निवेश कर दी। लेकिन जब उन्होंने पैसा निकालने की कोशिश की, तो उन्हें लगातार टाला गया और अतिरिक्त पैसे जमा करने का दबाव बनाया गया।

जांच में सामने आया कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता था। साइबर सेल ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर एक आरोपी शाहरुख को चिन्हित किया, जिसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा होना शुरू हुआ। इसके बाद पांच अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।

लुधियाना, हैदराबाद और राजस्थान से जुड़े आरोपी

गिरफ्तार अन्य आरोपियों में लुधियाना का इंदरजीत सिंह, हैदराबाद का अदनान तथा राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी मनीष और हरेंद्र शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क में हर सदस्य की अलग-अलग भूमिका थी, जैसे पीड़ितों को जोड़ना, फर्जी ऐप बनाना, बैंक खातों का संचालन और पैसों की हेराफेरी करना।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 18 मोबाइल फोन, 33 पासबुक और चेकबुक, 22 एटीएम कार्ड और एक लैपटॉप बरामद किया है। माना जा रहा है कि इन उपकरणों का उपयोग कई फर्जी खातों को संचालित करने और अलग-अलग राज्यों में वित्तीय लेन-देन के लिए किया जा रहा था।

फर्जी ट्रेडिंग डैशबोर्ड से दिखाया जाता था लाभ

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने एडवांस साइबर तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी ट्रेडिंग डैशबोर्ड तैयार किए थे। इन डैशबोर्ड पर निवेशकों को नकली लाभ और बढ़ते खाते का ग्राफ दिखाया जाता था, जिससे वे बार-बार निवेश करने के लिए प्रेरित होते थे।

जैसे ही बड़ी रकम जमा हो जाती थी, पीड़ितों से संपर्क तोड़ दिया जाता था या फिर उनसे और पैसे जमा करने की मांग की जाती थी। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह ने कई अन्य लोगों को भी ठगा हो सकता है और इसकी जांच की जा रही है।

डिजिटल फॉरेंसिक जांच से खुल सकती हैं और परतें

डिजिटल फॉरेंसिक टीम अब जब्त उपकरणों की जांच कर रही है ताकि बैंक खातों, ट्रांजैक्शन और कॉल रिकॉर्ड का पता लगाया जा सके। जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क देशभर में फैले अन्य साइबर फ्रॉड मॉड्यूल्स से भी जुड़ा हो सकता है।

अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अनजान लिंक के जरिए आने वाले निवेश प्रस्तावों से सतर्क रहें। पुलिस ने कहा कि कोई भी वैध वित्तीय संस्था इस तरह अनचाहे मैसेज या ऐप के जरिए निवेश नहीं करवाती।

फिलहाल गिरफ्तार आरोपी पूछताछ के घेरे में हैं और जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क की और परतें सामने आ सकती हैं और एक बड़ा साइबर फ्रॉड रैकेट उजागर हो सकता है।

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