मथुरा (उत्तर प्रदेश). मथुरा के राया क्षेत्र से एक बड़ा वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि उससे जिम खोलने के नाम पर ₹1 करोड़ से अधिक की ठगी की गई। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किस तरह निजी रिश्तों और भरोसे का इस्तेमाल कर संगठित वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है।
पीड़ित संदीप भँरगर की शिकायत के अनुसार, मुकेश कुमार, उनके पुत्र कान्हा और सहयोगी सन्नी उर्फ स्वप्नेश ने पहले परिवार से नजदीकी और भरोसा बनाकर इस पूरे खेल की शुरुआत की। आरोप है कि धीरे-धीरे उन्हें जिम व्यवसाय में निवेश के लिए राजी किया गया और इसे बेहद लाभदायक कारोबार के रूप में पेश किया गया।
पीड़ित ने बताया कि वर्ष 2022–23 में उनके परिवार को आलू की फसल से करीब ₹2 करोड़ की आय हुई थी। इसी वित्तीय स्थिति को देखते हुए आरोपियों ने उन्हें निशाना बनाया और जिम प्रोजेक्ट में निवेश करने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया। भरोसा जीतने के बाद उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि यह एक स्थायी और उच्च लाभ वाला व्यवसाय होगा।
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शिकायत के अनुसार, शुरुआत में जिम सेटअप के नाम पर ₹50 लाख की राशि ली गई। लेकिन इसके बाद मामला केवल निवेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे इसे एक बड़े बैंकिंग फ्रॉड में बदल दिया गया। आरोप है कि इसके बाद दस्तावेज़ों का दुरुपयोग और वित्तीय कागज़ी कार्रवाई की गई।
पीड़ित का आरोप है कि उन्हें इंदौर ले जाया गया, जहां उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य बैंकिंग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इसी दौरान उनके नाम पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंदौर शाखा में खाते खोले गए। इसके बाद बिना उनकी स्पष्ट सहमति के लगभग ₹50-50 लाख के दो बैंक लोन स्वीकृत कर निकाले गए।
मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित के मोबाइल पर बैंक से लोन और लेन-देन से जुड़े मैसेज आने लगे। इन संदेशों में बड़े वित्तीय ट्रांजैक्शन और लोन की जानकारी देखकर उन्हें पूरे फर्जीवाड़े की आशंका हुई। इसके बाद उन्होंने आरोपियों से संपर्क कर पैसे लौटाने और लोन चुकाने की मांग की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला।
लगातार प्रयासों के बाद पीड़ित ने कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन आरोपियों की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा और राया थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
पुलिस अब बैंक खातों, लोन दस्तावेजों, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि खाते खोलने और लोन प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही और पैसे किस दिशा में ट्रांसफर किए गए।
प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह एक योजनाबद्ध वित्तीय धोखाधड़ी का मामला हो सकता है, जिसमें भरोसे का फायदा उठाकर संवेदनशील बैंकिंग जानकारी हासिल की गई। जांच टीम अब पूरे फंड फ्लो को ट्रैक कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि रकम कहां-कहां भेजी गई।
साइबर और वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में तकनीकी हैकिंग से ज्यादा मनोवैज्ञानिक तरीके अपनाए जाते हैं, जहां पीड़ित को भरोसे में लेकर दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और सभी आरोपों की पुष्टि बैंक रिकॉर्ड और फॉरेंसिक विश्लेषण के आधार पर की जाएगी। जांच अभी जारी है और पूरे वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
