इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसने ‘फैमिली मॉडल’ पर आधारित ठगी का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। इस गिरोह में शामिल चारों आरोपी सगे भाई हैं, जो मिलकर देशभर में लोगों को डिजिटल माध्यमों से ठगी का शिकार बना रहे थे। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से नकदी, डिजिटल निवेश और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
प्रारंभिक जांच में ही यह सामने आया है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और विभिन्न राज्यों में फैले अपने नेटवर्क के जरिए लोगों को निशाना बना रहा था। अब तक 20 से अधिक शिकायतें (एनसीआर) अलग-अलग राज्यों से सामने आ चुकी हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि ठगी का दायरा काफी व्यापक था।
कैसे शुरू हुआ साइबर ठगी का नेटवर्क
पुलिस जांच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क की शुरुआत परिवार के एक सदस्य सतीश से हुई, जो हरियाणा के पानीपत में नौकरी करता था। वहीं उसकी मुलाकात साइबर फ्रॉड से जुड़े एक व्यक्ति से हुई। जल्दी पैसा कमाने के लालच में उसने इस अवैध गतिविधि की शुरुआत की और कुछ ही समय में अच्छा मुनाफा कमाने लगा।
इसके बाद सतीश ने नौकरी छोड़ दी और अपने गांव लौटकर अपने भाइयों को भी इस धंधे में शामिल कर लिया। परिवार के चारों भाइयों ने मिलकर संगठित तरीके से काम करना शुरू किया, जिसमें हर सदस्य की भूमिका तय थी—कोई बैंक खातों का संचालन करता था तो कोई लोगों को फर्जी ऐप्स के जरिए फंसाने का काम करता था।
लॉटरी ऐप बना ठगी का सबसे बड़ा हथियार
गिरोह का मुख्य तरीका अनरजिस्टर्ड लॉटरी ऐप्स के जरिए लोगों को झांसे में लेना था। पुलिस के अनुसार, ये लोग करीब 82 संदिग्ध ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे थे, जिनमें लोगों को भारी इनाम जीतने का लालच दिया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति इन ऐप्स पर रजिस्ट्रेशन करता या पैसे जमा करता, उसे और अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
धीरे-धीरे यह रकम बड़ी ठगी में बदल जाती थी और पीड़ितों को कोई रिटर्न नहीं मिलता था। ठगी की राशि अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी, जिन्हें मनी म्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का संपर्क अन्य साइबर अपराधियों से भी था।
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₹91 लाख से ज्यादा की संपत्ति का खुलासा
पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरोह के पास से कुल ₹91 लाख 18 हजार 42 की संपत्ति का खुलासा हुआ है। इसमें ₹30 लाख 60 हजार नकद और करीब ₹60 लाख से अधिक डिजिटल खातों में निवेश शामिल है। इसके अलावा 9 मोबाइल फोन, 19 एटीएम कार्ड, कई सिम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, पैन कार्ड और एक बाइक भी बरामद की गई है।
बरामद सामान से यह साफ है कि गिरोह तकनीकी रूप से काफी सक्रिय था और योजनाबद्ध तरीके से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था।
बैंकिंग सिस्टम की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान कुछ बैंक कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है। आशंका जताई जा रही है कि खातों के संचालन और लेनदेन में अंदरूनी मदद मिली हो सकती है। इस पहलू की जांच जारी है और यदि संलिप्तता साबित होती है, तो मामले में और गिरफ्तारी संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर फ्रॉड में बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, जिसके लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही जरूरी है।
बढ़ते साइबर अपराध का खतरनाक ट्रेंड
यह मामला इस बात का संकेत है कि साइबर अपराध अब संगठित गिरोहों के साथ-साथ पारिवारिक स्तर तक फैल चुका है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते उपयोग के साथ ठगी के तरीके भी अधिक जटिल और संगठित होते जा रहे हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। अनजान ऐप्स, लॉटरी ऑफर्स और संदिग्ध लिंक से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है। किसी भी ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करना आवश्यक है।
कानूनी संदेश और आगे की कार्रवाई
पुलिस अब इस गिरोह के अन्य संभावित कनेक्शन और नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने लोगों को इस गिरोह ने ठगी का शिकार बनाया है।
यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि साइबर अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कानून सख्ती से काम कर रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर ठगी करने वालों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं होगा।
