बरेली में महिला बनी साइबर जाल का शिकार; व्हाट्सऐप पर भेजी APK फाइल से मोबाइल हैक, पांच ट्रांजैक्शन में ₹5.25 लाख की ठगी

“डिलीवरी लेट, ठगी फास्ट: फर्जी कस्टमर केयर ने मिनटों में उड़ाए लाखों रुपये”

Roopa
By Roopa
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बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पार्सल की देरी की शिकायत करना एक महिला के लिए भारी पड़ गया। फर्जी कस्टमर केयर के जाल में फंसाकर साइबर अपराधियों ने व्हाट्सऐप के जरिए एक APK फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करते ही महिला का मोबाइल हैक कर लिया। इसके बाद कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खाते से ₹5.25 लाख की रकम निकाल ली गई।

पीड़िता मंजू, जो इज्जतनगर क्षेत्र स्थित कर्मचारी नगर ऑफिसर्स कॉलोनी की निवासी हैं, ने बताया कि उन्होंने एक ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट से सामान ऑर्डर किया था। डिलीवरी 19 अप्रैल को होनी थी, लेकिन पार्सल समय पर नहीं पहुंचा। पार्सल की जानकारी लेने के लिए उन्होंने इंटरनेट पर कस्टमर केयर नंबर सर्च किया और उसी नंबर पर कॉल कर दिया। यही एक छोटी सी गलती उनके लिए भारी नुकसान का कारण बन गई।

फर्जी कस्टमर केयर ने जीता भरोसा

फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को कंपनी का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताया और बेहद भरोसेमंद तरीके से बात करते हुए शिकायत दर्ज करने का आश्वासन दिया। बातचीत के दौरान उसने कुछ सामान्य जानकारी हासिल की और फिर प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर व्हाट्सऐप पर एक APK फाइल भेज दी। इसे ‘शिकायत/सुझाव ऐप’ बताया गया, जिससे पीड़िता को उस पर कोई शक नहीं हुआ।

जैसे ही महिला ने APK फाइल डाउनलोड कर उसे ओपन किया, उनका मोबाइल डिवाइस साइबर ठगों के नियंत्रण में चला गया। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी फाइलों में छिपा मैलवेयर फोन का रिमोट एक्सेस दे देता है, जिससे अपराधी बैंकिंग ऐप, मैसेज और अन्य संवेदनशील डाटा तक आसानी से पहुंच बना लेते हैं।

कुछ ही मिनटों में खाते से उड़ गए ₹5.25 लाख

मोबाइल हैक होते ही ठगों ने तेजी से कार्रवाई की और पांच अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹5.25 लाख की राशि खाते से निकाल ली। पूरी प्रक्रिया इतनी तेज थी कि पीड़िता को कुछ समझने या रोकने का मौका तक नहीं मिला। जब तक उन्हें धोखाधड़ी का एहसास हुआ, तब तक बैंक बैलेंस लगभग खाली हो चुका था।

घटना का पता चलते ही पीड़िता ने तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद साइबर क्राइम थाने में भी मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।

डिजिटल साक्ष्यों के जरिए आरोपियों की तलाश

जांच एजेंसियां अब कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह इस तरह के फर्जी कस्टमर केयर और APK स्कैम के जरिए लोगों को निशाना बना रहा है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि APK फाइल के जरिए फोन में मैलवेयर इंस्टॉल कर लिया जाता है, जिससे यूजर की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है। इसमें OTP, पासवर्ड और स्क्रीन एक्सेस तक शामिल होता है, जिससे बैंक खाते से पैसे निकालना आसान हो जाता है।

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साइबर ठगी का बदलता पैटर्न

यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि साइबर अपराधी अब आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों—जैसे पार्सल डिलीवरी, कस्टमर केयर या बैंकिंग सेवाओं—को ही हथियार बना रहे हैं। गूगल सर्च में फर्जी नंबर डालकर भरोसा पैदा किया जाता है और फिर तकनीकी तरीके से ठगी को अंजाम दिया जाता है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है, “आजकल साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेकर लोगों के भरोसे को हथियार बना रहे हैं। APK फाइल जैसे टूल्स के जरिए वे सीधे डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान कुछ ही मिनटों में हो जाता है। सबसे बड़ा बचाव जागरूकता और सतर्कता ही है।”

कैसे बचें ऐसे साइबर जाल से

विशेषज्ञों ने आम लोगों के लिए कुछ अहम सुझाव दिए हैं। किसी भी कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि जरूर करें। व्हाट्सऐप या अन्य प्लेटफॉर्म पर भेजी गई APK फाइल या अनजान लिंक को कभी डाउनलोड न करें।

इसके अलावा, फोन पर कभी भी बैंक से जुड़ी जानकारी, OTP या स्क्रीन शेयरिंग की अनुमति किसी को न दें। अगर कोई ऐप डाउनलोड करने के लिए कहता है, तो पहले उसकी वैधता की जांच करें और केवल आधिकारिक ऐप स्टोर का ही इस्तेमाल करें।

जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि डिजिटल दुनिया में छोटी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान में बदल सकती है। जहां एक ओर ऑनलाइन सेवाएं जीवन को आसान बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधियों के लिए नए मौके भी पैदा हो रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है, लेकिन सबसे प्रभावी बचाव जागरूकता ही है। सतर्क रहकर और सावधानी बरतकर ही ऐसे जाल से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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