फ्री ट्रायल ऑफर पर क्लिक करने के बाद क्रेडिट कार्ड से ₹87,000 कटने की घटना ने ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन और छिपे चार्ज के खतरे को फिर उजागर किया।

एक क्लिक और ₹87,000 गायब: फ्री ट्रायल स्कैम में फंसा सेलिब्रिटी फैमिली मेंबर

Team The420
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मुंबई। डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता के बीच साइबर ठगी के नए-नए तरीके लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला अभिनेत्री आर्चना पुरन सिंह के परिवार से जुड़ा सामने आया है, जिसमें उनके बेटे आयुष्मान सेठी कथित रूप से फ्री ट्रायल स्कैम का शिकार होकर करीब ₹87,000 की ठगी का शिकार हो गए।

यह पूरा मामला एक ऐसे ऑनलाइन ऑफर से शुरू हुआ, जिसमें एक डिजिटल प्लेटफॉर्म ने “सात दिन का फ्री ट्रायल” देने का दावा किया था। शुरुआत में यह ऑफर सामान्य और भरोसेमंद लगा, जिसके चलते आयुष्मान ने इसे स्वीकार कर लिया। लेकिन यही एक क्लिक बाद में भारी वित्तीय नुकसान का कारण बन गया।

परिवार के व्लॉग में साझा किए गए विवरण के अनुसार, शुरुआती चरण में केवल एक छोटा ट्रांजैक्शन हुआ था, जिसे सामान्य वेरिफिकेशन प्रक्रिया बताया गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद उनके क्रेडिट कार्ड से अचानक ₹87,000 की बड़ी राशि एक साथ डेबिट हो गई, जिससे पूरे परिवार में हलचल मच गई।

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आयुष्मान ने बताया कि उन्होंने जैसे ही अपने बैंक स्टेटमेंट में यह अनधिकृत ट्रांजैक्शन देखा, तुरंत परिवार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद आर्चना पुरन सिंह ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उन्हें तुरंत बैंक से संपर्क करने और कार्ड ब्लॉक कराने की सलाह दी। वहीं परमीट सेठी ने स्पष्ट किया कि पूरे कार्ड को बंद करने की बजाय केवल संदिग्ध ट्रांजैक्शन को विवादित (dispute) करना अधिक सही प्रक्रिया है।

जानकारी के अनुसार, जिस प्लेटफॉर्म पर यह ट्रायल लिया गया था, उसने शुरुआत में छोटे शुल्क के जरिए भरोसा बनाया और बाद में बिना स्पष्ट अनुमति के पूरा वार्षिक सब्सक्रिप्शन शुल्क काट लिया। यह पूरा मॉडल “ऑटो-रिन्यूअल” और छिपी शर्तों पर आधारित बताया जा रहा है।

आयुष्मान ने यह भी बताया कि जब उन्होंने ग्राहक सहायता (customer support) से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्हें सीधे किसी प्रतिनिधि से बात नहीं कराई गई, बल्कि उन्हें ऑटोमेटेड या एआई आधारित जवाबों की ओर निर्देशित किया गया, जिससे समस्या का समाधान और अधिक कठिन हो गया।

परिवार के व्लॉग में यह पूरा घटनाक्रम गंभीर होने के बावजूद कई बार हल्के-फुल्के माहौल में बदल गया। परिवार के अन्य सदस्यों ने स्थिति पर मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी, जिससे तनावपूर्ण माहौल कुछ हद तक कम होता दिखा। हालांकि, आर्थिक नुकसान को लेकर चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर उन प्लेटफॉर्म्स पर जो फ्री ट्रायल या बेहद कम कीमत वाले सब्सक्रिप्शन का लालच देते हैं। इन ऑफर्स के पीछे अक्सर ऑटो-रिन्यूअल और छिपे हुए शुल्क जैसी शर्तें होती हैं, जिन्हें उपयोगकर्ता नजरअंदाज कर देते हैं।

इसी संदर्भ में प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “आज के समय में साइबर अपराधी सबसे ज्यादा भरोसे और जल्दबाजी का फायदा उठा रहे हैं। फ्री ट्रायल या ₹0 ऑफर जैसे दिखने वाले स्कैम दरअसल एक मनोवैज्ञानिक जाल होते हैं, जिसमें यूजर को धीरे-धीरे बड़े भुगतान की ओर धकेला जाता है। लोग बिना पढ़े अनुमति दे देते हैं और बाद में पूरा नियंत्रण ठगों के हाथ में चला जाता है।”

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश लोग ट्रायल लेते समय नियम और शर्तों को ध्यान से नहीं पढ़ते, जिसके कारण बाद में बड़े ऑटोमेटिक चार्ज लग जाते हैं। कई मामलों में यह पूरी प्रक्रिया उपयोगकर्ता की अनुमति के शुरुआती छोटे ट्रांजैक्शन के आधार पर आगे बढ़ती रहती है।

वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि ऐसी स्थिति में तुरंत बैंक को सूचित करना, कार्ड को अस्थायी रूप से ब्लॉक कराना, और ट्रांजैक्शन को औपचारिक रूप से विवादित करना जरूरी होता है। इसके साथ ही साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना भी महत्वपूर्ण कदम है, जिससे जांच आगे बढ़ सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल सुविधाएं जितनी आसान हैं, उतना ही उनमें जोखिम भी छिपा हुआ है। एक छोटे से क्लिक या अनुमति से शुरू हुआ ट्रायल कई बार बड़े वित्तीय नुकसान में बदल सकता है।

साइबर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन ऑफर, विशेषकर फ्री ट्रायल या डिस्काउंट सब्सक्रिप्शन को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी शर्तों को ध्यान से पढ़ें और केवल विश्वसनीय प्लेटफॉर्म्स का ही उपयोग करें।

यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों को हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है, क्योंकि यह सीधे व्यक्तिगत वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर खतरा है।

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