हैदराबाद। शहर में एक संगठित इंटर-स्टेट सिल्वर फ्रॉड गैंग का पर्दाफाश हुआ है, जहां व्यापारियों को नकली चांदी देकर असली चांदी लेकर फरार होने की सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह का एक अन्य सदस्य अलग कार्रवाई में पकड़ा गया। शुरुआती जांच से पता चला है कि यह गिरोह कई राज्यों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम देता रहा है।
यह मामला तब सामने आया जब सिकंदराबाद के महाकाली इलाके में स्थित एक उद्योग संचालक ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, 25 मार्च 2026 को शाम करीब 4:30 बजे उनका एक नियमित ग्राहक राजेश अपने एक साथी के साथ तीन कच्ची चांदी की बार लेकर पहुंचा। इन बार की शुद्धता क्रमशः 61%, 63.75% और 62.75% बताई गई थी और इनके साथ कथित टेस्टिंग सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत किए गए थे।
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पुराने कारोबारी संबंधों के चलते शिकायतकर्ता ने बिना विस्तृत जांच किए इन बार पर भरोसा कर लिया। इसके बाद आरोपियों ने 60% शुद्धता वाली बताकर कुल 6,350 ग्राम की 25 छोटी चांदी की बार लीं और मौके से निकल गए। बाद में जब इन बार की जांच कराई गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ—इनमें चांदी का अंश शून्य पाया गया। इस धोखाधड़ी से व्यापारी को करीब ₹15 लाख का नुकसान हुआ।
जांच आगे बढ़ने पर इसी तरह के दो और मामले सामने आए, जिनमें 6.3 किलो और 6.2 किलो चांदी की ठगी की गई थी। इससे स्पष्ट हुआ कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक संगठित और सुनियोजित नेटवर्क है, जो एक तय पैटर्न के तहत अलग-अलग स्थानों पर वारदात को अंजाम देता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह के सदस्य उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और उनका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड हृदेश कुमार बताया जा रहा है, जिसने इस ठगी की योजना तैयार की थी।
तफ्तीश में सामने आया कि आरोपी पहले व्यापारियों का विश्वास जीतने के लिए असली चांदी की बार सप्लाई करते थे, जिनकी शुद्धता लगभग 60% होती थी। जब व्यापारी पूरी तरह भरोसा करने लगते थे, तब गिरोह नकली चांदी की बार—जिनमें कोई वास्तविक धातु नहीं होती थी—फर्जी सर्टिफिकेट के साथ सौंप देता था और बदले में असली चांदी लेकर फरार हो जाता था।
इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी अलग-अलग स्थानों से की गई। 20 अप्रैल को हृदेश कुमार को ट्रांजिट वारंट के जरिए आगरा से गिरफ्तार किया गया। इसके अगले दिन सुशील कुमार वर्मा और प्रिंस लड्डू सोनी को भी आगरा से पकड़ा गया, जबकि राजीव जैन को इटावा से हिरासत में लिया गया। गिरोह के एक अन्य सदस्य सोनू कुशवाहा को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया गया।
कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से 8.4 किलो चांदी, ₹1.5 लाख नकद और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अन्य मामलों में भी वांछित हैं, जिनमें अलग-अलग स्थानों पर 6 से 6.2 किलो चांदी की ठगी शामिल है। प्रत्येक मामले में नुकसान की राशि करीब ₹15 लाख आंकी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह “ट्रस्ट-बिल्डिंग फ्रॉड” का एक क्लासिक उदाहरण है, जिसमें अपराधी पहले छोटे स्तर पर भरोसा बनाते हैं और फिर बड़े स्तर पर धोखाधड़ी करते हैं। खासतौर पर कीमती धातुओं के कारोबार में इस तरह की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जहां फर्जी सर्टिफिकेट और नकली सामग्री के जरिए व्यापारियों को निशाना बनाया जाता है।
यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि व्यापारिक लेन-देन में सतर्कता और सत्यापन की प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण है। केवल पुराने संबंधों या दस्तावेजों के आधार पर भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाने में जुटी हैं। शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह गिरोह देशभर में सक्रिय हो सकता है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और भी मामलों का खुलासा हो सकता है।
