हैदराबाद। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे “AI-आधारित ट्रेडिंग” के झांसे ने एक बार फिर बड़ा वित्तीय नुकसान कराया है। हैदराबाद के एक व्यक्ति को कथित तौर पर ₹1.88 करोड़ की चपत लग गई, जहां ठगों ने इंस्टाग्राम विज्ञापन, ईमेल और व्हाट्सऐप के जरिए सुनियोजित तरीके से उसे अपने जाल में फंसाया। यह मामला इस बात का ताजा उदाहरण है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले आकर्षक निवेश ऑफर आम लोगों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित को इंस्टाग्राम पर “AI-आधारित क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म” का एक विज्ञापन दिखाई दिया। इस प्लेटफॉर्म का नाम ‘Naka Solutions’ बताया गया, जिसे बाद में पूरी तरह फर्जी पाया गया। विज्ञापन देखने के बाद पीड़ित से संपर्क किया गया और उसे एक अनवेरिफाइड लिंक के जरिए एक ट्रेडिंग ऐप पर अकाउंट बनाने के लिए कहा गया। यहीं से ठगी की पूरी स्क्रिप्ट शुरू हुई।
शुरुआत में ठगों ने पीड़ित को छोटे-छोटे निवेश करने के लिए प्रेरित किया। विश्वास बढ़ाने के लिए उसे एक बार मामूली रकम निकालने की अनुमति भी दी गई, जिससे उसे प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता पर भरोसा हो गया। इसके बाद ट्रेडिंग डैशबोर्ड पर लगातार फर्जी मुनाफा दिखाया गया और उसे व्हाट्सऐप ग्रुप्स में जोड़कर अन्य तथाकथित निवेशकों की एक्टिविटी भी दिखाई गई, ताकि माहौल पूरी तरह भरोसेमंद लगे।
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धीरे-धीरे पीड़ित को बड़ी रकम निवेश करने के लिए उकसाया गया। जब उसने भारी निवेश कर दिया और मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने नई चाल चली। निकासी के नाम पर उससे “टैक्स”, “कन्वर्जन फीस” और “ट्रांजैक्शन चार्ज” जैसे कई फर्जी शुल्क वसूले गए। पीड़ित लगातार भुगतान करता रहा, लेकिन उसके खाते में कोई पैसा वापस नहीं आया। इस तरह चरणबद्ध तरीके से उससे कुल ₹1.88 करोड़ की ठगी कर ली गई।
जांच में सामने आया कि यह पूरा ऑपरेशन बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था। ठग पहले सोशल मीडिया विज्ञापन के जरिए शिकार ढूंढते हैं, फिर व्यक्तिगत संपर्क कर विश्वास बनाते हैं और अंत में बड़े निवेश के लिए दबाव बनाते हैं। फर्जी ऐप और डैशबोर्ड के जरिए मुनाफे का भ्रम पैदा किया जाता है, जिससे पीड़ित को लगता है कि उसका पैसा तेजी से बढ़ रहा है।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “साइबर अपराधी आजकल सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेकर लोगों को फंसाते हैं। पहले छोटे रिटर्न दिखाकर भरोसा बनाया जाता है और फिर बड़े निवेश के लिए प्रेरित किया जाता है। एक बार पैसा जमा हो जाने के बाद निकासी के नाम पर अलग-अलग शुल्क मांगकर ठगी को अंजाम दिया जाता है।”
विशेषज्ञों के अनुसार, AI और क्रिप्टो जैसे आधुनिक शब्दों का इस्तेमाल कर ठग अपने प्लेटफॉर्म को ज्यादा विश्वसनीय बनाने की कोशिश करते हैं। आम निवेशकों को यह समझना चाहिए कि कोई भी वैध प्लेटफॉर्म अनवेरिफाइड लिंक के जरिए अकाउंट बनाने या बार-बार अलग-अलग शुल्क मांगने जैसी प्रक्रिया नहीं अपनाता।
इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी चेतावनी यह है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म कम समय में असामान्य रूप से अधिक मुनाफा देने का दावा करता है, तो वह अक्सर धोखाधड़ी का संकेत होता है। सोशल मीडिया पर दिखने वाले निवेश विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, केवल अधिकृत और सत्यापित ऐप का ही उपयोग करें और निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की जांच जरूर करें। किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना जरूरी है, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को कम किया जा सके।
