ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक बड़े नौकरी ठगी मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें नासिक के एक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने एक महिला और उसके परिचितों से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करीब ₹46 लाख की ठगी की। आरोपी ने खुद को मंत्रालय से जुड़ा अधिकारी बताकर फर्जी दस्तावेजों और झूठे प्रभाव का इस्तेमाल किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद को सरकारी मंत्रालय से जुड़ा हुआ बताता था और सचिवालय में ऊंचे संपर्क होने का दावा करता था। इसी झूठे परिचय के आधार पर वह लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पैसे वसूलता था।
यह पूरा मामला 7 जून 2024 से सितंबर 2025 के बीच का बताया जा रहा है। इस दौरान आरोपी ने मुंबई के भांडुप निवासी 45 वर्षीय महिला और उसके रिश्तेदारों व परिचितों को निशाना बनाया और उनसे नौकरी के नाम पर बड़ी रकम वसूली।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार किए थे, जिन पर नकली हस्ताक्षर भी थे। इन कागजों को असली दिखाकर पीड़ितों का भरोसा जीता गया और उनसे पैसे लिए गए।
शिकायत के अनुसार, महिला ने अकेले ₹35.25 लाख दिए, जबकि एक अन्य व्यक्ति ने ₹14 लाख का भुगतान किया। यह रकम ठाणे जिले के डोंबिवली क्षेत्र में एक कार्यालय में दी गई थी, जहां नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था।
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लेकिन लंबे समय तक इंतजार के बाद भी किसी को सरकारी नौकरी नहीं मिली। जब पीड़ितों ने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी ने केवल ₹3.25 लाख लौटाए और बाकी लगभग ₹46 लाख वापस करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर 20 अप्रैल को मानपाड़ा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने जानबूझकर एक फर्जी पहचान बनाई और नौकरी की तलाश में लगे लोगों की भावनाओं का फायदा उठाया। उसने फर्जी दस्तावेजों और झूठे वादों के जरिए लोगों को भरोसे में लिया।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी एक सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। वह पहले पीड़ितों का चयन करता था और फिर फर्जी कागजात दिखाकर सरकारी भर्ती प्रक्रिया जैसा माहौल बनाता था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में और लोग भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह मामला एक बार फिर उस पैटर्न को उजागर करता है, जिसमें बेरोजगारी का फायदा उठाकर फर्जी नौकरी घोटाले किए जाते हैं। ऐसे मामलों में नकली नियुक्ति पत्र, फर्जी मोहर और अधिकारियों की नकल का इस्तेमाल किया जाता है।
पुलिस अब वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है और यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।
फिलहाल जांच जारी है और पुलिस सभी डिजिटल और वित्तीय सबूतों को खंगाल रही है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
