Consumer Federation of America का आरोप—फर्जी सरकारी ऑफर और स्कैम विज्ञापनों से यूजर्स को भारी नुकसान, कंपनी पर मुनाफे के लिए अनदेखी का दावा

“सोशल मीडिया बना धोखाधड़ी का मंच? ‘फ्री फोन’ स्कैम पर Meta के खिलाफ क्लास-एक्शन मुकदमा”

Roopa
By Roopa
4 Min Read

वॉशिंगटन डीसी। दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में शामिल Meta एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला सीधे तौर पर Facebook और Instagram पर दिखने वाले कथित स्कैम विज्ञापनों से जुड़ा है, जिनको लेकर अमेरिका के Consumer Federation of America (CFA) ने कंपनी के खिलाफ क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया है।

मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि Meta के प्लेटफॉर्म्स पर लंबे समय से “फ्री iPhone”, “सरकारी कैश पेमेंट” और अन्य फर्जी ऑफर्स वाले विज्ञापन बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे हैं। इन विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती है कि उन्हें मुफ्त में महंगे स्मार्टफोन या सरकारी लाभ मिल सकते हैं, जबकि वास्तविकता में यह संगठित ऑनलाइन धोखाधड़ी का हिस्सा होते हैं।

CFA का दावा है कि ये विज्ञापन सिर्फ कुछ अलग-थलग मामले नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं, जो लगातार प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहते हैं। संगठन के अनुसार, Meta को इन स्कैम विज्ञापनों की जानकारी होने के बावजूद वे पर्याप्त सख्ती नहीं बरत रही है।

मुकदमे में यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल में ऐसे हाई-रिस्क विज्ञापनों को अप्रत्यक्ष रूप से जगह दी है, जिससे उसे बड़ा राजस्व प्राप्त होता है। CFA के अनुसार, कुछ आंतरिक अनुमानों में यह संकेत मिला है कि Meta की वार्षिक विज्ञापन आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संदिग्ध या प्रतिबंधित विज्ञापनों से जुड़ा हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हर दिन अरबों की संख्या में ऐसे हाई-रिस्क विज्ञापन यूजर्स के सामने आते हैं, जिनमें से कई सीधे तौर पर स्कैम या फिशिंग गतिविधियों से जुड़े होते हैं। यह स्थिति डिजिटल सुरक्षा और यूजर ट्रस्ट दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

हालांकि Meta ने इन सभी आरोपों को सख्ती से खारिज किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि यह मुकदमा कंपनी के सुरक्षा प्रयासों को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है। Meta का दावा है कि उसने पिछले वर्ष ही 150 मिलियन से अधिक फर्जी विज्ञापनों को हटाया है और लाखों ऐसे अकाउंट्स को बंद किया है जो स्कैम गतिविधियों में शामिल थे।

कंपनी के अनुसार, उसके सिस्टम ने लगभग 92% स्कैम विज्ञापनों को यूजर्स की शिकायत से पहले ही पहचानकर ब्लॉक कर दिया था। Meta ने यह भी कहा है कि स्कैम विज्ञापनों को लेकर यूजर रिपोर्ट्स में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो सुरक्षा सुधारों का संकेत है।

इसके बावजूद, शिकायतकर्ता संगठन का कहना है कि यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है क्योंकि स्कैम विज्ञापन अभी भी बड़े पैमाने पर मौजूद हैं और यूजर्स को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। CFA ने अदालत से मांग की है कि Meta पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाए और उसके विज्ञापन सिस्टम में संरचनात्मक सुधार किए जाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे डिजिटल विज्ञापन उद्योग के लिए एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। इससे यह बहस और तेज हो गई है कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अपनी जिम्मेदारी से ज्यादा विज्ञापन राजस्व को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अगर अदालत CFA के पक्ष में फैसला देती है, तो यह सोशल मीडिया विज्ञापन नीतियों और वैश्विक स्तर पर डिजिटल रेगुलेशन को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और इस पर तकनीकी दुनिया, निवेशकों और यूजर्स की निगाहें टिकी हुई हैं।

हमसे जुड़ें

Share This Article