IPO निवेश के नाम पर रचा गया जाल; पहले दिखाया नकली मुनाफा, फिर धीरे-धीरे निकलवाए लाखों रुपये

“₹53 लाख की ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी: फर्जी ऐप और मुनाफे के झांसे में महिला बनी साइबर गिरोह का शिकार”

Roopa
By Roopa
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पुणे। ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, और ताजा मामला पुणे से सामने आया है, जहां एक 46 वर्षीय महिला को फर्जी शेयर ट्रेडिंग स्कीम में फंसाकर करीब ₹53 लाख की ठगी कर ली गई। यह धोखाधड़ी सुनियोजित तरीके से कई चरणों में अंजाम दी गई, जिसमें पहले भरोसा जीतने के लिए छोटे निवेश पर नकली मुनाफा दिखाया गया और बाद में बड़ी रकम ऐंठ ली गई।

शिकायत के अनुसार, पीड़िता जनवरी के अंत में एक ऑनलाइन विज्ञापन के संपर्क में आई, जिसमें IPO और शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का दावा किया गया था। विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बाद महिला को एक तथाकथित निवेश सलाहकार से जोड़ा गया, जिसने उसे कम जोखिम में ज्यादा रिटर्न का भरोसा दिलाया।

फर्जी ऐप से रचा गया विश्वास का खेल

आरोप है कि ठगों ने महिला को एक लिंक भेजा और उसे एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। इस ऐप को इस तरह डिजाइन किया गया था कि उसमें निवेश और मुनाफा दोनों वास्तविक दिखें। शुरुआत में महिला से छोटी-छोटी रकम निवेश करवाई गई और ऐप पर उसे मुनाफा दिखाया गया, जिससे उसका भरोसा मजबूत होता गया।

धीरे-धीरे ठगों ने महिला को अधिक निवेश के लिए प्रेरित किया। उन्हें बताया गया कि ज्यादा रकम लगाने पर उच्च रिटर्न मिलेगा। भरोसे में आकर महिला ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹52.72 लाख ट्रांसफर कर दिए।

निकासी की कोशिश में खुला पूरा खेल

मामले का खुलासा तब हुआ जब महिला ने अपने कथित मुनाफे को निकालने की कोशिश की। उसे बताया गया कि निकासी के लिए अतिरिक्त शुल्क या टैक्स देना होगा। जब उसने इन शर्तों पर सवाल उठाया, तो ठगों ने जवाब देना बंद कर दिया और संपर्क पूरी तरह खत्म कर दिया।

इसके बाद महिला को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी है। उसने तुरंत संबंधित साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। जांच एजेंसियों ने बैंक लेन-देन और खातों की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मनोवैज्ञानिक रणनीति से फंसाते हैं ठग

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ठगी में सबसे पहले पीड़ित का भरोसा जीतना सबसे अहम कदम होता है। छोटे निवेश पर नकली मुनाफा दिखाकर पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि सिस्टम वास्तविक है। इसके बाद लालच और भरोसे के मिश्रण से बड़ी रकम निकलवाई जाती है।

यह पूरी प्रक्रिया मनोवैज्ञानिक तरीके से डिजाइन की जाती है, जहां पीड़ित को धीरे-धीरे जोखिम लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। जब तक उसे शक होता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

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फर्जी प्लेटफॉर्म और मल्टी-अकाउंट नेटवर्क

जांच में यह भी सामने आ रहा है कि इस तरह के गिरोह कई बैंक खातों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पैसे का ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। अक्सर ये खाते फर्जी पहचान या म्यूल अकाउंट्स के जरिए खोले जाते हैं।

ऐप और वेबसाइट भी अस्थायी होते हैं, जिन्हें कुछ समय बाद बंद कर दिया जाता है या बदल दिया जाता है, ताकि ट्रैकिंग से बचा जा सके।

तेजी से बढ़ रहे हैं ऑनलाइन निवेश फ्रॉड

हाल के वर्षों में ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही इस तरह के साइबर अपराधों में भी इजाफा हुआ है। खासकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए ऐसे विज्ञापन तेजी से फैलाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बिना सत्यापन के किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म या ऐप पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता जांचना बेहद जरूरी है।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

इस घटना के बाद साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, ऐप डाउनलोड करने या बिना जांच के पैसे ट्रांसफर करने से बचना चाहिए।

यदि कोई प्लेटफॉर्म असामान्य रूप से ज्यादा मुनाफे का वादा करता है, तो यह एक चेतावनी संकेत हो सकता है। साथ ही, निवेश से पहले अधिकृत और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेना जरूरी है।

यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि डिजिटल युग में वित्तीय सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है। थोड़ी सी लापरवाही भी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है, जबकि जागरूकता और सावधानी से ऐसे जाल से बचा जा सकता है।

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