भुवनेश्वर। बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसमें ₹5.21 करोड़ की हेराफेरी और 105 गोल्ड लोन खातों में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले में आरोप है कि एक बैंक अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारियों का दुरुपयोग करते हुए न केवल फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन मंजूर किए, बल्कि कई मामलों में बिना किसी वास्तविक सोने की गिरवी के ही करोड़ों रुपये जारी कर दिए गए।
जानकारी के अनुसार, आरोपी प्रशांत कुमार मलिक बैंक में वरिष्ठ पद पर कार्यरत था और उसकी जिम्मेदारी गोल्ड लोन की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और गिरवी रखे गए आभूषणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना थी। इसी पद का कथित दुरुपयोग करते हुए उसने नियमों को दरकिनार कर लंबे समय तक यह वित्तीय गड़बड़ी जारी रखी।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब वर्ष 2025 में बैंक के वरिष्ठ स्तर पर नियमित निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी से गोल्ड लोन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन वह आवश्यक फाइलें उपलब्ध नहीं करा सका। इसी दौरान उसकी गतिविधियों पर संदेह गहराया और वह अचानक बैंक से फरार हो गया।
इसके बाद बैंक स्तर पर आंतरिक ऑडिट शुरू किया गया, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि कुल 105 गोल्ड लोन खातों में गंभीर अनियमितताएं की गई थीं। इनमें से 31 मामलों में नकली आभूषणों को वास्तविक सोना दिखाकर लोन स्वीकृत किया गया, जबकि 74 खातों में बिना किसी सोने की प्राप्ति के ही ऋण मंजूरी दे दी गई थी।
ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई मामलों में दस्तावेजी प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया और जांच प्रक्रिया को केवल कागजों तक सीमित रखा गया। इससे यह साफ हुआ कि यह घोटाला अचानक नहीं बल्कि एक सुनियोजित तरीके से लंबे समय तक चलाया गया।
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घोटाले के उजागर होने के बाद बैंक प्रबंधन ने विस्तृत जांच कराई और वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा, जिससे उसकी तलाश में कठिनाइयाँ बढ़ती रहीं।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसमें सिस्टम की कमजोरियों की भी बड़ी भूमिका सामने आ रही है। गोल्ड लोन प्रक्रिया में भौतिक सत्यापन और दस्तावेजी जांच के स्तर पर गंभीर लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि कुछ स्तरों पर मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
लंबी तलाश के बाद आरोपी को आखिरकार भुवनेश्वर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उससे लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं और धन का प्रवाह किन माध्यमों से हुआ।
इस पूरे मामले ने बैंकिंग क्षेत्र में गोल्ड लोन प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती चरण में ही आभूषणों और दस्तावेजों की सख्त जांच की गई होती, तो इस तरह के बड़े घोटाले को रोका जा सकता था।
फिलहाल बैंक प्रशासन ने आंतरिक प्रक्रियाओं की समीक्षा शुरू कर दी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है। वहीं, आरोपी से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन और खातों की गहन जांच जारी है, जिससे इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
