न्हावा शेवा पोर्ट पर DRI की बड़ी कार्रवाई, तूर दाल की आड़ में प्रतिबंधित और नियंत्रित बीजों की अंतरराष्ट्रीय खेप का भंडाफोड़; आयातक गिरफ्तार, पूरे नेटवर्क की जांच तेज

“132 कंटेनर, ₹139 करोड़ का माल और बड़ा धोखा: आयात के नाम पर खुला तस्करी का नेटवर्क”

Roopa
By Roopa
5 Min Read

मुंबई/नवी मुंबई। देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक बंदरगाहों में शामिल न्हावा शेवा पोर्ट पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक बड़ी और संगठित तस्करी साजिश का पर्दाफाश करते हुए करीब ₹139 करोड़ मूल्य के 132 कंटेनरों को जब्त किया है। यह कार्रवाई उस समय सामने आई जब आयात दस्तावेजों में तूर दाल बताकर भारी मात्रा में प्रतिबंधित और नियंत्रित कृषि बीजों को देश में लाने की कोशिश की जा रही थी।

खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में कुल 3,029 मीट्रिक टन माल से भरे कंटेनरों की जांच की गई। कागजों में इस खेप को ‘तूर दाल/अरहर दाल’ के रूप में घोषित किया गया था, लेकिन जब भौतिक सत्यापन किया गया तो पूरे सिस्टम की परतें खुलती चली गईं। जांच में 2,710 मीट्रिक टन तरबूज (वाटरमेलन) के बीज और 319 मीट्रिक टन हरे मटर (ग्रीन पीस) बरामद किए गए।

कागजों में दाल, असल में प्रतिबंधित बीजों का जाल

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से नियमों को दरकिनार करने का प्रयास था। आयात दस्तावेजों में माल को सामान्य खाद्य उत्पाद दिखाकर सीमा शुल्क और आयात प्रतिबंधों से बचने की कोशिश की गई।

सरकारी नियमों के अनुसार, तरबूज और अन्य खरबूजा वर्ग के बीजों के आयात पर मई–जून 2024 से सख्त प्रतिबंध या सीमित अनुमति लागू है। यह प्रावधान विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना संख्या 05/2023 (दिनांक 5 अप्रैल 2024) के तहत लागू किया गया था।

इसी तरह हरे मटर के आयात पर भी कड़े नियम लागू हैं। DGFT की अधिसूचना संख्या 37/2015–20 (दिनांक 18 दिसंबर 2019) के तहत इसके लिए न्यूनतम आयात मूल्य ₹200 प्रति किलोग्राम (CIF) निर्धारित किया गया है और इसे केवल कोलकाता पोर्ट के माध्यम से ही आयात करने की अनुमति है।

तंजानिया और सूडान से आया नेटवर्क का सुराग

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पूरी खेप तंजानिया और सूडान से भेजी गई थी। अधिकारियों को शक है कि यह कोई साधारण व्यापारिक लेन-देन नहीं बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है, जो कृषि उत्पादों की आड़ में प्रतिबंधित वस्तुओं को भारत में खपाने का काम कर रहा था।

DRI के अनुसार, इस तरह की गतिविधियां न केवल सीमा शुल्क नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि देश के कृषि बाजार और स्थानीय उत्पादकों के हितों को भी प्रभावित करती हैं। इससे वैध व्यापारियों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा होती है।

आयातक गिरफ्तार, गहराई से चल रही जांच

इस पूरे मामले में आयात करने वाली फर्म के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। शुरुआती जांच में उसे इस पूरे रैकेट का मुख्य संचालक माना जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों, वित्तीय लेन-देन और लॉजिस्टिक चैनल की गहराई से जांच कर रही हैं।

अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक खेप तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे कई राज्यों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला नेटवर्क हो सकता है।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

और भी बड़ी खेपों की आशंका

जांच एजेंसियों ने आशंका जताई है कि इसी तरह की और भी खेपें अन्य बंदरगाहों या लॉजिस्टिक मार्गों से देश में प्रवेश कर चुकी हो सकती हैं। इसी वजह से पूरे आयात-निर्यात नेटवर्क की निगरानी और सख्त कर दी गई है।

DRI ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि डिजिटल रिकॉर्ड, शिपिंग दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है।

आर्थिक और सिस्टम पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की हेराफेरी से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होता है। साथ ही यह बाजार में असंतुलन पैदा करती है और वैध आयातकों के लिए कठिन प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनाती है। कृषि आपूर्ति श्रृंखला और मूल्य निर्धारण पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

जांच जारी, नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद

फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की हर परत को खंगालने में जुटी हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी नाम सामने आ सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस तस्करी नेटवर्क का पूरा ढांचा उजागर हो सकता है।

हमसे जुड़ें

Share This Article