कानपुर। आईपीएल मैचों के दौरान मोबाइल एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध सट्टा संचालित करने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह का सरगना मनीष उर्फ ‘प्रोफेसर’ महाराष्ट्र से फरार बताया जा रहा है। मौके से ₹3.92 करोड़ नकद, तीन नोट गिनने की मशीन, एक करेंसी चेकिंग मशीन, छह मोबाइल फोन और एक कार बरामद की गई है।
यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से कार के अंदर बैठकर संचालित किया जा रहा था, जहां आरोपी आईपीएल मैचों पर लाइव सट्टा लगवाते थे और डिजिटल तथा नकद दोनों माध्यमों से लेन-देन को नियंत्रित करते थे।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह ‘BetHub 24.com’ नामक बेटिंग एप के जरिए पूरे सट्टा नेटवर्क को चला रहा था। मोबाइल फोन और व्हाट्सएप चैट के माध्यम से ग्राहकों को जोड़ा जाता था और दांव लगाने की पूरी प्रक्रिया डिजिटल सिस्टम से नियंत्रित होती थी।
लालच का जाल बिछाकर ठगी का शातिर तरीका
पुलिस जांच के अनुसार, यह गिरोह बेहद चालाकी से काम करता था। पहले ग्राहकों को छोटे दांव में जीत दिलाकर भरोसे में लिया जाता था। शुरुआती जीत के बाद लोग बड़े दांव लगाने लगते थे, जिसके बाद उन्हें जानबूझकर हार की ओर धकेल दिया जाता था।
यह पूरा सिस्टम एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम करता था, जिसमें ग्राहक को लगातार फंसाकर भारी रकम वसूली जाती थी।
मास्टर आईडी से नियंत्रित होता था पूरा खेल
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का सरगना मनीष उर्फ ‘प्रोफेसर’ एक मास्टर आईडी का इस्तेमाल करता था, जिसके जरिए बड़े दांव लगाने वाले ग्राहकों के परिणाम नियंत्रित किए जाते थे। इसी सिस्टम के आधार पर जीत और हार तय की जाती थी।
छोटी जीत की रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की जाती थी, जबकि बड़ी रकम का भुगतान नकद में किया जाता था ताकि किसी भी प्रकार की डिजिटल ट्रैकिंग से बचा जा सके।
पांच आरोपी गिरफ्तार, तीन राज्यों तक फैला नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपियों में कानपुर के कौशलपुरी निवासी कार्तिक लखवानी, फजलगंज निवासी राजकुमार, गुजरात के मेहसाणा जिले के उंझा निवासी कल्पेश, रवि नाई और विष्णु शामिल हैं। सभी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यह पूरा नेटवर्क तीन राज्यों में फैला हुआ था। कानपुर के आरोपी ग्राहकों को आईडी उपलब्ध कराते थे, जबकि गुजरात के सदस्य कैश कलेक्शन और सेटलमेंट का काम संभालते थे।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
किराए के मकान से चलता था पूरा ऑपरेशन
आरोपियों ने बताया कि पूरा सट्टा रैकेट किदवई नगर स्थित एक किराए के मकान से संचालित किया जा रहा था, जिसका मासिक किराया ₹60,000 था। इसी स्थान से डिजिटल नेटवर्क और कैश ट्रांजैक्शन का पूरा संचालन होता था।
पुलिस ने छापेमारी कर वहां से भी भारी मात्रा में नकदी, नोट गिनने की मशीनें और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बरामद किए।
कार के अंदर बैठकर चल रहा था सट्टा कारोबार
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि यह पूरा सट्टा नेटवर्क एक सफेद कार के अंदर बैठकर संचालित किया जा रहा था। गोविंदपुरी पुल के नीचे खड़ी इस कार से आरोपी आईपीएल मैचों के दौरान लाइव सट्टा लगवाते थे।
संयुक्त पुलिस टीमों ने कार्रवाई करते हुए मौके से कार्तिक लखवानी और राजकुमार को गिरफ्तार किया।
डिजिटल सबूत और आयकर विभाग की एंट्री
छापेमारी के दौरान पुलिस को मोबाइल फोन से कई अहम डिजिटल सबूत मिले, जिनमें बेटिंग एप की गतिविधियां, व्हाट्सएप चैट और पैसों के लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड शामिल है।
बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद मामले की जानकारी आयकर विभाग को भी दी गई है, जो अब अपने स्तर पर जांच कर रहा है।
20 हजार की नौकरी में काम कर रहे थे आरोपी
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ आरोपी मात्र ₹20,000 मासिक वेतन पर इस पूरे गिरोह के लिए काम कर रहे थे। उनका काम ग्राहकों को जोड़ना और कैश कलेक्शन करना था।
सरगना की तलाश जारी, नेटवर्क के विस्तार की आशंका
फिलहाल गिरोह का मास्टरमाइंड मनीष उर्फ ‘प्रोफेसर’ फरार है और उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल कानपुर तक सीमित नहीं है और इसके तार कई राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जुड़े हो सकते हैं।
पूरे सट्टा नेटवर्क की वित्तीय और डिजिटल ट्रेल की गहराई से जांच जारी है, और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
