कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु तक फैले संगठित नेटवर्क का खुलासा; शेल कंपनियों और फर्जी बिलिंग के जरिए ₹102.5 करोड़ के अवैध ITC क्लेम का मामला उजागर

“₹410 करोड़ का GST घोटाला: फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट रैकेट का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड गिरफ्तार, साथी फरार”

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By Roopa
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार के वाणिज्यिक कर विभाग की प्रवर्तन शाखा (दक्षिण क्षेत्र) ने एक बड़े अंतर-राज्यीय फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें लगभग ₹410 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। इस मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद तौकीर उर्फ मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि उसका सहयोगी शेख जकीर हुसैन उर्फ बाशा फरार बताया जा रहा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से शेल कंपनियों का उपयोग कर फर्जी इनवॉइस तैयार करता था और बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति के इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करता था। इस अवैध सिस्टम के जरिए सरकार को लगभग ₹102.5 करोड़ का प्रत्यक्ष राजस्व नुकसान हुआ है।

शेल कंपनियों और फर्जी बिलिंग से चलता था पूरा नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग राज्यों में कई फर्जी कंपनियां बनाकर GST पंजीकरण प्राप्त करते थे। इसके बाद बिना किसी वास्तविक व्यापार के फर्जी बिल जारी किए जाते थे, जिन्हें आगे अन्य कंपनियों को भेजकर ITC क्लेम किया जाता था। यह पूरा नेटवर्क कई परतों में काम करता था ताकि लेन-देन की वास्तविकता छिपाई जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह लगातार GST रजिस्ट्रेशन बदलता रहता था, मोबाइल नंबर और बैंक खाते बार-बार बदलकर जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश करता था। इस तरह की तकनीक के जरिए उन्होंने एक जटिल वित्तीय जाल तैयार किया था।

तीन राज्यों में फैला था घोटाले का नेटवर्क

यह घोटाला केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु तक फैले हुए थे। आरोपी इन राज्यों में फैली कंपनियों के माध्यम से फर्जी बिलिंग और टैक्स क्रेडिट का लेन-देन करते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क अलग-अलग स्तरों पर काम करता था, जहां कुछ लोग कंपनियां बनाते थे, कुछ फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे और बाकी लोग टैक्स क्रेडिट को आगे ट्रांसफर करते थे।

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सतर्कता और निगरानी के बाद गिरफ्तारी

लंबे समय तक निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर मुख्य आरोपी मोहम्मद तौकीर को बेंगलुरु में उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह फरार होने की कोशिश कर रहा था। उसे विशेष आर्थिक अपराध न्यायालय में पेश किया गया, जहां उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

उसका सहयोगी शेख जकीर हुसैन फिलहाल फरार है और माना जा रहा है कि वह देश से बाहर भाग चुका है। उसकी तलाश में कानूनी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मदद ली जा रही है।

संगठित और योजनाबद्ध तरीके से की गई धोखाधड़ी

जांच अधिकारियों के अनुसार, यह घोटाला बेहद संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत था। इसमें डिजिटल रिकॉर्ड्स, फर्जी बैंक ट्रांजैक्शन और शेल नेटवर्क का इस्तेमाल कर एक जटिल वित्तीय संरचना बनाई गई थी, जिससे सामान्य जांच में इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता था।

इस नेटवर्क में शामिल लोग अलग-अलग स्तरों पर काम करते थे, जिससे पूरी प्रणाली एक व्यावसायिक संरचना की तरह दिखती थी, जबकि असल में यह एक फर्जीवाड़ा था।

सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान, जांच जारी

इस पूरे घोटाले के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। अधिकारी अब पूरे नेटवर्क के वित्तीय प्रवाह, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की गहन जांच कर रहे हैं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल एक छोटा हिस्सा हो सकता है और इसके पीछे और भी बड़े नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं।

फिलहाल फरार आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है और अन्य सहयोगियों की पहचान के लिए जांच का दायरा और बढ़ाया जा रहा है।

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