शेल कंपनियों और UPI नेटवर्क के जरिए फंड रूटिंग का खुलासा; ₹13 करोड़ GST चोरी का अनुमान, फिनटेक सिस्टम की भूमिका पर गंभीर सवाल

“गेमिंग ट्रांजैक्शन से GST चोरी तक का जाल: ₹47 करोड़ रूटिंग केस में जांच एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई”

Roopa
By Roopa
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हैदराबाद/विशाखापत्तनम। ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें कथित तौर पर शेल कंपनियों और UPI नेटवर्क के जरिए ₹47 करोड़ से अधिक के लेनदेन को रूट किया गया। इस मामले में प्रवर्तन एजेंसियों ने कड़ा कदम उठाते हुए बेंगलुरु स्थित Neokred Technologies Private Ltd के दो वरिष्ठ अधिकारियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

विशेष आर्थिक अपराध अदालत ने कंपनी के वरिष्ठ पदाधिकारियों Tarun Suresh Nazare (33) और Rohith Reji (30) को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। दोनों को विशाखापत्तनम सेंट्रल जेल में रखा गया है, जबकि मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।

जांच की शुरुआत और संदिग्ध नेटवर्क का पर्दाफाश

Directorate General of GST Intelligence (DGGI) की जांच में यह सामने आया कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा है, जो ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स से जुड़े लेनदेन को बिना GST भुगतान के प्रोसेस कर रहा था।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, Neokred को एक “master merchant” और payment gateway aggregator के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जो विभिन्न merchant entities को onboard कर UPI IDs उपलब्ध कराती थी। इन IDs के जरिए Teen Patti, Rummy Master, Dragon और अन्य ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स से जुड़े ट्रांजैक्शन किए जा रहे थे।

शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों की रूटिंग

एजेंसियों ने पाया कि Eyebrawn Technologies Private Ltd जैसी कई शेल कंपनियां बनाई गई थीं, जिनका वास्तविक कोई व्यवसाय नहीं था। इन्हीं फर्जी संस्थाओं के जरिए करीब ₹47 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन रूट किए गए।

DGGI के अनुसार, अकेले Eyebrawn के जरिए लगभग ₹47 करोड़ का फंड फ्लो हुआ, जिससे करीब ₹13 करोड़ GST चोरी का अनुमान लगाया गया है। इन कंपनियों का उद्देश्य केवल असली लेनदेन को छिपाना और टर्नओवर को दबाना था।

UPI सिस्टम और बैंकिंग नेटवर्क का कथित दुरुपयोग

जांच में यह भी सामने आया कि Neokred ने Fino Payments Bank सहित कई बैंकिंग पार्टनर्स के साथ मिलकर UPI IDs जारी किए, जिन्हें घोषित ई-कॉमर्स गतिविधियों के बजाय ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े फंड कलेक्शन के लिए इस्तेमाल किया गया।

एजेंसियों का दावा है कि यूजर्स से प्राप्त भुगतान सीधे गेमिंग ट्रांजैक्शन से जुड़े थे, जबकि दस्तावेजों में इन्हें सामान्य व्यापारिक लेनदेन के रूप में दिखाया गया था। यह प्रक्रिया वित्तीय सिस्टम के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है।

कंपनी की भूमिका पर गंभीर आरोप

DGGI की रिपोर्ट में कहा गया है कि Neokred ने merchant onboarding, KYC verification, API integration और transaction routing जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम्स पर नियंत्रण रखा, लेकिन पर्याप्त due diligence और risk profiling नहीं की गई।

जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने या तो लापरवाही से या जानबूझकर ऐसे व्यापारियों को सिस्टम में शामिल किया जिनका वास्तविक व्यवसाय मौजूद नहीं था।

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छापेमारी और डिजिटल सबूत

17 अप्रैल को Eyebrawn के ठिकानों पर छापेमारी में पाया गया कि कंपनी पूरी तरह से निष्क्रिय थी और केवल फंड रूटिंग के लिए बनाई गई थी। इसके बाद 20 अप्रैल को Neokred के कार्यालयों पर भी छापेमारी की गई और अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए।

हालांकि, जांच एजेंसी के अनुसार पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने कई सवालों पर अस्पष्ट जवाब दिए और सहयोग में कमी दिखाई।

बड़ा वित्तीय नेटवर्क होने की आशंका

प्रवर्तन एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल टैक्स चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ऑनलाइन गेमिंग, फिनटेक कंपनियों और बैंकिंग APIs का एक जटिल नेटवर्क शामिल है।

इस तरह के सिस्टम में transaction layering और multiple shell entities का उपयोग कर असली फंड फ्लो को छिपाया जाता है, जिससे जांच मुश्किल हो जाती है।

कानूनी प्रावधान और सख्त कार्रवाई

DGGI ने अदालत को बताया कि यह मामला CGST Act के तहत cognisable और non-bailable अपराध है, जिसमें अधिकतम 5 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

साइबर और वित्तीय अपराध विशेषज्ञ तथा पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे मामले डिजिटल फाइनेंस सिस्टम के लिए गंभीर खतरा हैं। उनके अनुसार, “ऑनलाइन गेमिंग और फिनटेक इकोसिस्टम के बीच मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी की जा रही है। शेल कंपनियों और पेमेंट गेटवे के गलत उपयोग को रोकने के लिए मजबूत रेगुलेशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जरूरी है।”

आगे की जांच जारी

एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क का दायरा किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें किन अन्य बैंकिंग व फिनटेक संस्थाओं की भूमिका हो सकती है।

यह मामला भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में मौजूद संभावित कमजोरियों को उजागर करता है और दिखाता है कि तकनीकी प्रगति के साथ मजबूत निगरानी व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।

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