कोलकाता। ‘कैश ऑन डिलीवरी’ (COD) जैसे भरोसेमंद माने जाने वाले भुगतान विकल्प को भी अब साइबर अपराधियों ने ठगी का हथियार बना लिया है। शहर में एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जो ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों को निशाना बनाकर डिलीवरी से पहले ही भुगतान करवा लेता था। इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 9 महिलाएं भी शामिल हैं।
जांच के दौरान सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क एक फर्जी कॉल सेंटर के जरिए संचालित हो रहा था। पुलिस ने गरियाहाट इलाके में छापेमारी कर इस कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया, जहां से 43 मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, लैपटॉप और वायरलेस डिवाइस बरामद किए गए। बरामद सामग्री से यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बना चुका था।
कैसे काम करता था ‘COD फ्रॉड’ का नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ कि जालसाज पहले विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से ग्राहकों की डिजिटल जानकारी जुटाते थे। वे खासतौर पर उन लोगों को टारगेट करते थे, जिन्होंने ‘कैश ऑन डिलीवरी’ के जरिए सामान ऑर्डर किया होता था।
इसके बाद गिरोह के सदस्य खुद को डिलीवरी एजेंट या संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि बताकर ग्राहकों को कॉल करते थे। बातचीत के दौरान वे यह कहते थे कि तकनीकी कारणों से नकद भुगतान संभव नहीं है और अब भुगतान ऑनलाइन ही करना होगा।
ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए QR कोड भेजा जाता था या किसी मोबाइल नंबर पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता था। कई मामलों में यह भी कहा जाता था कि पेमेंट वेरिफिकेशन के बिना डिलीवरी संभव नहीं है, जिससे ग्राहक जल्दबाजी में भुगतान कर देते थे।
पेमेंट के बाद टूट जाता था संपर्क
जैसे ही ग्राहक ऑनलाइन भुगतान कर देता था, ठग तुरंत संपर्क तोड़ देते थे। इसके बाद न तो कोई डिलीवरी होती थी और न ही पैसे वापस मिलते थे।
कई पीड़ितों ने बताया कि बाद में जब असली डिलीवरी एजेंट उनके घर पहुंचा, तब उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने जिस व्यक्ति को पैसे भेजे थे, वह असली प्रतिनिधि नहीं बल्कि ठग था।
कॉल सेंटर मॉडल पर चलता था पूरा ऑपरेशन
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह एक प्रोफेशनल कॉल सेंटर की तरह काम कर रहा था। इसमें अलग-अलग भूमिकाएं तय थीं—कुछ सदस्य डेटा इकट्ठा करते थे, कुछ कॉलिंग करते थे और कुछ भुगतान प्राप्त करने की जिम्मेदारी संभालते थे।
फर्जी सिम कार्ड और डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर पहचान छुपाने की कोशिश की जाती थी, ताकि ट्रैकिंग से बचा जा सके। यह नेटवर्क तकनीकी रूप से काफी संगठित और प्रशिक्षित प्रतीत होता है।
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लगातार शिकायतों के बाद कार्रवाई
पिछले कुछ समय से इस तरह की ठगी की कई शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसमें ग्राहकों ने डिलीवरी से पहले भुगतान करने के बाद सामान न मिलने की बात कही थी। इन शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की गई और अंततः इस गिरोह का भंडाफोड़ हुआ।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क का विस्तार अन्य राज्यों तक तो नहीं है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर अपराधी अब लोगों की आदतों और व्यवहार का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं। ‘कैश ऑन डिलीवरी’ जैसे भरोसेमंद विकल्प को ही हथियार बनाकर वे सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों को भ्रमित करते हैं और जल्दी निर्णय लेने के लिए मजबूर करते हैं।”
क्या सावधानी बरतें ग्राहक
- ‘कैश ऑन डिलीवरी’ ऑर्डर में सामान मिलने से पहले कभी भुगतान न करें
- किसी भी अनजान कॉल पर QR कोड स्कैन कर पेमेंट न करें
- डिलीवरी एजेंट की पहचान की पुष्टि करें
- केवल आधिकारिक ऐप या वेबसाइट के जरिए ही भुगतान करें
- संदिग्ध कॉल या मैसेज की तुरंत शिकायत करें
बदलते साइबर अपराध के तरीके
यह घटना साफ संकेत देती है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। जहां पहले OTP और बैंक फ्रॉड आम थे, वहीं अब ऑनलाइन शॉपिंग और डिलीवरी सिस्टम को भी ठगी का माध्यम बनाया जा रहा है।
तेजी से डिजिटल होती दुनिया में उपभोक्ताओं के लिए सतर्क रहना और सही जानकारी रखना बेहद जरूरी हो गया है। जागरूकता और सावधानी ही ऐसे संगठित साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
