अमेरिका की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी Amazon ने वॉशिंगटन राज्य की अदालत में एक बड़ा मुकदमा दायर किया है, जिसमें एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर करीब $4 मिलियन (लगभग ₹33.2 करोड़) के फर्जी रिफंड घोटाले का आरोप लगाया गया है। कंपनी का कहना है कि इस नेटवर्क ने ग्राहकों और सिस्टम को धोखा देकर हाई-वैल्यू इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर गलत रिफंड हासिल किए।
Telegram पर चल रहा था संगठित फ्रॉड नेटवर्क
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, ‘RBK’ नाम का यह समूह Telegram मैसेजिंग ऐप पर सक्रिय था और इसके 1,000 से अधिक सब्सक्राइबर थे। इस नेटवर्क ने कथित तौर पर 2,000 से ज्यादा “वॉउचर्स” यानी सफल फर्जी रिफंड के स्क्रीनशॉट और दावे पोस्ट किए, जिससे नए यूजर्स को जोड़ा जाता था।
जांच में सामने आया कि यह गिरोह लोगों को लैपटॉप, गेमिंग कंसोल, स्मार्टफोन और ग्राफिक्स कार्ड जैसे महंगे प्रोडक्ट खरीदने के लिए कहता था। इसके बाद ग्राहक के Amazon लॉगिन और भुगतान विवरण लेकर यह समूह ग्राहक बनकर कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करता था और “पैकेज नहीं मिला” जैसी झूठी शिकायतें दर्ज कराता था।
15% से 30% कमीशन पर चलता था पूरा खेल
Amazon के अनुसार, यह नेटवर्क हर सफल फर्जी रिफंड पर 15% से 30% तक कमीशन लेता था। इसके अलावा, कई मामलों में “खाली पैकेज मिला” जैसी झूठी रिपोर्ट और फर्जी पुलिस शिकायतें भी तैयार की जाती थीं, ताकि कंपनी के रिफंड सिस्टम को गुमराह किया जा सके।
आंतरिक जांच से हुआ खुलासा
कंपनी ने बताया कि इस पूरे फ्रॉड का खुलासा तब हुआ जब एक आंतरिक जांचकर्ता ने खुद ग्राहक बनकर इस प्रक्रिया को समझने की कोशिश की। परीक्षण खरीद के बाद उसे भी फर्जी तरीके से रिफंड दिलाया गया, जिससे यह साफ हो गया कि सिस्टम में गंभीर खामियों का फायदा उठाया जा रहा है।
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₹62 लाख से ज्यादा की जांच लागत
Amazon ने इस पूरे मामले की जांच में $75,000 (लगभग ₹62 लाख) से अधिक खर्च किए हैं। कंपनी ने अदालत से नुकसान की भरपाई, कानूनी खर्च और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी अनुरोध किया गया है कि आरोपियों को Amazon और Telegram के नाम या ब्रांड का इस्तेमाल करने से स्थायी रूप से रोका जाए।
ओवरसीज IP और क्रिप्टो पेमेंट्स का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क से जुड़े लॉगिन कई विदेशी IP एड्रेस से किए गए थे। इसके अलावा, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भुगतान लेने और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन चैनलों का इस्तेमाल कर पूरे ऑपरेशन को छुपाने की कोशिश की गई।
बढ़ता साइबर फ्रॉड का ट्रेंड
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फर्जी रिफंड और ई-कॉमर्स फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं। Telegram और अन्य एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे ये नेटवर्क सोशल इंजीनियरिंग और फर्जी डॉक्यूमेंट्स के जरिए बड़े पैमाने पर ठगी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल एक कंपनी का मामला नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर ई-कॉमर्स सिस्टम को निशाना बनाने वाला संगठित साइबर अपराध है।
निष्कर्ष
Amazon का यह मामला दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते साइबर फ्रॉड कितने संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुके हैं। ₹33 करोड़ से अधिक के इस कथित घोटाले ने न केवल ई-कॉमर्स सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स का दुरुपयोग बड़े वित्तीय अपराधों के लिए किया जा रहा है।
