अंगमाली अर्बन को-ऑपरेटिव सोसायटी में फर्जी लोन के आरोप; 422 संदिग्ध ऋणों की जांच जारी, कई गिरफ्तारियां

“फर्जी दस्तावेज, नकली लोन और गायब पैसा: ₹96 करोड़ को-ऑपरेटिव घोटाले पर बढ़ता आक्रोश”

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By Roopa
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कोच्चि। केरल के कोच्चि क्षेत्र में सामने आए कथित ₹96 करोड़ के को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले को लेकर निवेशकों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्षों से अपनी जमा पूंजी वापस पाने की कोशिश कर रहे निवेशकों ने अब 27 अप्रैल 2026 को ‘ब्लैक फ्लैग’ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। यह प्रदर्शन कथित आरोपियों के ठिकानों और संबंधित संस्थानों के बाहर किया जाएगा, जिससे जांच और कार्रवाई की मांग और तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, यह आंदोलन एक निवेशक समिति के नेतृत्व में किया जाएगा, जिसमें वे सभी लोग शामिल हैं जिनकी रकम इस सोसायटी में फंस गई है। समिति का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से लगातार अपील करने के बावजूद उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली है, जिसके चलते अब उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

तीन साल से फंसी निवेशकों की पूंजी

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं की जीवनभर की बचत इस सोसायटी में फंस गई है। कई लोगों ने अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स, पारिवारिक पूंजी और लंबे समय की बचत यहां निवेश की थी, जो अब वापस नहीं मिल पा रही है।

निवेशकों का आरोप है कि संस्था के भीतर लंबे समय तक वित्तीय अनियमितताएं चलती रहीं, लेकिन समय रहते उन पर रोक नहीं लगाई गई। धीरे-धीरे यह मामला एक बड़े वित्तीय घोटाले में बदल गया, जिसने सैकड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित कर दी है।

422 फर्जी लोन का खुलासा

जांच एजेंसियों ने प्रारंभिक जांच में बड़ी अनियमितताओं का पता लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 422 संदिग्ध लोन ऐसे दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए, जिनका उपयोग कई मामलों में असली मालिकों की जानकारी के बिना किया गया।

इन फर्जी लोन के जरिए भारी रकम निकाल ली गई, जिससे सोसायटी की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई। कई मामलों में जमीन और संपत्ति के असली मालिकों को इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनके नाम पर लोन लिया गया है।

कई गिरफ्तारियां, जांच जारी

अब तक इस मामले में करीब 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें पूर्व बोर्ड सदस्य और सोसायटी के कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि निवेशकों का कहना है कि अभी भी कई बड़े नाम जांच के दायरे से बाहर हैं और पूरे नेटवर्क का खुलासा होना बाकी है।

अधिकारियों द्वारा बैंक ट्रांजैक्शन, दस्तावेज और संबंधित खातों की गहन जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फंड का उपयोग कहां और कैसे किया गया।

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केंद्रीय एजेंसी जांच की मांग तेज

निवेशक समिति ने इस मामले की जांच को और गहराई से कराने के लिए Enforcement Directorate की भूमिका की मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला केवल स्थानीय धोखाधड़ी नहीं बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित आर्थिक अपराध से भी जुड़ा हो सकता है।

समिति ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी इस पूरे नेटवर्क को चलाने और फर्जी लोन को मंजूरी दिलाने में हो सकती है।

प्रदर्शन से बढ़ेगा दबाव

27 अप्रैल को होने वाला ब्लैक फ्लैग विरोध प्रदर्शन इस मामले में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। निवेशकों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के जरिए वे प्रशासन और जांच एजेंसियों पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि जांच में तेजी आए और दोषियों पर कार्रवाई हो सके।

प्रदर्शन के दौरान निवेशक आरोपियों की संपत्ति जब्त करने, सख्त कार्रवाई करने और फंसे हुए पैसे की वसूली की मांग करेंगे। साथ ही सहकारी क्षेत्र में सख्त सुधारों की भी मांग उठने की संभावना है।

को-ऑपरेटिव सेक्टर की साख पर सवाल

इस घोटाले ने सहकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से न केवल निवेशकों का भरोसा टूटता है, बल्कि पूरे वित्तीय तंत्र पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

वे मानते हैं कि सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, नियमित ऑडिट और सख्त निगरानी प्रणाली लागू करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके।

न्याय और भरोसे की लड़ाई

यह मामला सिर्फ ₹96 करोड़ के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों निवेशकों के भरोसे और भविष्य से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। तीन साल से न्याय का इंतजार कर रहे लोग अब अपने हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।

आने वाले दिनों में जांच की दिशा और विरोध प्रदर्शन का असर यह तय करेगा कि क्या निवेशकों को उनका पैसा वापस मिल पाएगा और क्या दोषियों को सजा मिलेगी। फिलहाल यह मामला वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता की एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

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