QR कोड के जरिए रिश्तेदारों के खातों में मंगवाई गई रकम, रेलवे और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बनाने की साजिश का शक

संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का खुलासा: पाकिस्तान हैंडलर्स से ₹2 लाख की फंडिंग, 8 बैंक खाते सीज

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By Roopa
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लखनऊ/बिजनौर। उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का बड़ा खुलासा किया है, जिसमें पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से फंडिंग लेकर भारत में गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रची जा रही थी। जांच में सामने आया है कि करीब आठ बैंक खातों के जरिए लगभग ₹2 लाख की रकम मंगवाई गई, जिसे अब सीज कर दिया गया है।

पुलिस और एटीएस की संयुक्त जांच में पता चला है कि मेरठ निवासी आकिब और बिजनौर निवासी आजाद इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे। दोनों के पासपोर्ट निरस्त कर दिए गए हैं। बताया गया कि इनमें से एक आरोपी को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरा स्थानीय स्तर पर पकड़ा गया। एक अन्य आरोपी विदेश से लौटते समय हिरासत में लिया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों और करीबियों के बैंक खातों का उपयोग करते हुए QR कोड के जरिए पैसों का लेनदेन कराया। इन खातों को पाकिस्तानी हैंडलर्स से जोड़कर छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन के रूप में रकम भेजी जाती थी, ताकि किसी भी संदेह से बचा जा सके।

एटीएस की शुरुआती रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह पैसा किसी बड़ी साजिश के लिए फंडिंग के तौर पर भेजा गया था। जांच में यह भी सामने आया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए आरोपियों का संपर्क पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से लगातार बना हुआ था।

सूत्रों के अनुसार, इस मॉड्यूल का उद्देश्य भारत में रेलवे सिस्टम, सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक स्थलों पर हमला करने की साजिश रचना था। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि रेलवे सिग्नल सिस्टम में गड़बड़ी और ट्रेनों में आगजनी जैसी घटनाओं की योजना बनाई जा रही थी।

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पुलिस के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में एक इंस्टाग्राम वीडियो कॉल के जरिए हथियारों का प्रदर्शन किया गया था, जिसमें एके-47 और हैंड ग्रेनेड जैसे हथियार दिखाए गए थे। इसी वीडियो के बाद मामला दर्ज कर जांच तेज की गई थी।

जांच एजेंसियों ने यह भी पाया कि आरोपियों का नेटवर्क पंजाब और अन्य राज्यों तक फैला हुआ था। संदिग्ध गतिविधियों के तहत हिंदू धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की योजना की आशंका जताई गई है।

अब तक की जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क में शामिल लोगों को पाकिस्तान से निर्देश मिलते थे और उन्हें छोटे-मोटे कार्यों के बदले रकम दी जाती थी। यह रकम कभी QR कोड, कभी बैंक ट्रांसफर और कभी मनी म्यूल खातों के जरिए भेजी जाती थी।

पुलिस ने संबंधित सभी बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और उनके ट्रांजेक्शन की विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि किन-किन लोगों ने इन खातों का उपयोग किया और किस स्तर पर फंडिंग का नेटवर्क फैला हुआ था।

एटीएस अधिकारियों का कहना है कि इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों में भी छापेमारी की जाएगी। विदेशी कनेक्शन की जांच के लिए केंद्र स्तर पर भी सूचना साझा की गई है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि किस तरह छोटे वित्तीय लेनदेन और डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल कर आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग की जा रही है। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।

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