बरेली। कैंट थाना क्षेत्र से गिरफ्तार साइबर ठग गैंग को लेकर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि इस गिरोह ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार गैंग ने देशभर में फैले नेटवर्क के जरिए भारी वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह द्वारा उपयोग किए गए बैंक खातों से जुड़े मामलों में करीब करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है। जांच में सामने आया है कि यह गैंग पीड़ितों को डराने के लिए खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी का अधिकारी बताकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देता था और फिर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करता था।
गिरोह का संचालन संगठित तरीके से किया जा रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह गैंग डॉ. सचेंद्र कुमार के ट्रस्ट “एसआर संस एंड ग्रुप” के खाते में पैसे मंगाकर उन्हें केरल समेत अन्य राज्यों में संचालित 22 से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर करता था, जिससे पैसों का स्रोत छिपाया जा सके।
इस पूरे नेटवर्क का सरगना नवाबगंज निवासी समित बताया जा रहा है, जबकि उसका भांजा निर्मल भी इस गिरोह में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। दोनों फिलहाल फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। जानकारी के अनुसार, दोनों के लखनऊ में छिपे होने की संभावना जताई जा रही है, जिसके आधार पर जांच टीमों ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है।
पुलिस ने अब तक इस मामले में शाकिब अली (फरादपुर, मोहल्ला बक्सरिया), आशीष सिंह (करगैना, जागतिनगर), राजकुमार (भमोरा, गांव बल्लिया), डॉ. सचेंद्र कुमार (अंबेडकरनगर, सिधौली), और बब्लू उर्फ माधोराम (बाराबंकी, रायपुर मजरे अगानपुर) सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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जांच में यह भी सामने आया है कि इस साइबर गिरोह के 15 बैंक खातों के खिलाफ देशभर में 524 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। इनमें अधिकांश मामले ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ऑनलाइन धमकी के जरिए पैसे ऐंठने से जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इन सभी शिकायतों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह पीड़ितों को वीडियो कॉल या फोन कॉल के जरिए डराता था और खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताता था। इसके बाद फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी देकर तत्काल पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया जाता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क केवल स्थानीय नहीं बल्कि कई राज्यों तक फैला हुआ है। केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक संगठित साइबर क्राइम नेटवर्क है।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर और भी अहम सुराग मिल सकते हैं। साथ ही फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूरे गिरोह के वित्तीय और तकनीकी नेटवर्क का पूरी तरह से खुलासा होने की संभावना है।
फिलहाल पुलिस और साइबर सेल की टीमें डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की गहन जांच में जुटी हैं, ताकि इस पूरे साइबर ठगी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
