कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की एक विशेष अदालत ने कोलकाता के कारोबारी जॉय कामदार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आठ दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ED) हिरासत में भेज दिया है। कामदार को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत रविवार को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में करीब ₹1100 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के सबूत मिले हैं।
ED के अनुसार, जॉय कामदार की कंपनी सन एंटरप्राइज के जरिए बड़े पैमाने पर संदिग्ध ट्रांजेक्शन किए गए। शुरुआती जांच में अब तक 25 से अधिक शेल और संदिग्ध कंपनियों की पहचान की जा चुकी है, जो इस कथित वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा हो सकती हैं।
एजेंसी ने अदालत को बताया कि जांच में सामने आया है कि विभिन्न बैंक खातों के जरिए लगभग ₹1100 करोड़ के लेनदेन किए गए, जिनमें से पिछले चार महीनों में करीब ₹500 करोड़ रुपये नकद जमा होने की बात भी सामने आई है। यह नकद प्रवाह इस मामले को और गंभीर बना देता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कोलकाता गुजरात एजुकेशन सोसाइटी के बैंक खाते से एक अन्य कंपनी में लगभग ₹40 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। ED का मानना है कि यह फंड डायवर्जन और लेयरिंग का हिस्सा हो सकता है, जिससे धन के असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।
इसके अलावा जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि जॉय कामदार और दक्षिण कोलकाता से जुड़े बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्प’ के बीच भी वित्तीय लेनदेन के संकेत मिले हैं। पोद्दार की एसपी कंस्ट्रक्शन नामक कंपनी से जुड़े दस्तावेजों में कामदार के साथ करीब ₹1.5 करोड़ के लेनदेन का रिकॉर्ड मिला है।
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चौंकाने वाला पहलू यह भी सामने आया है कि ED के अनुसार कामदार की कंपनी से पोद्दार की पत्नी के नाम पर आग्नेयास्त्र और गोलियां खरीदने से जुड़े लेनदेन के संकेत मिले हैं, जिसकी भी जांच की जा रही है। एजेंसी ने इसे संभावित अवैध गतिविधियों से जोड़कर देखा है।
ED ने अदालत में कहा कि पूछताछ के दौरान इस नेटवर्क में और कई लोगों की भूमिका उजागर हो सकती है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन कंपनियों के जरिए धन को कैसे विभिन्न खातों और लेयरों में घुमाया गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, कामदार के कुछ पुलिस अधिकारियों और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों से संबंधों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह समझा जा सके कि क्या इस नेटवर्क को किसी तरह का संरक्षण प्राप्त था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।
इस पूरे मामले पर साइबर और आर्थिक अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक क्लासिक मनी लॉन्ड्रिंग पैटर्न हो सकता है, जिसमें शेल कंपनियों, नकद जमा और मल्टी-लेयर ट्रांजेक्शन का उपयोग कर अवैध धन को वैध रूप देने की कोशिश की जाती है।
फिलहाल ED की टीम बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन डेटा और कंपनी दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई संभव है।
यह मामला एक बार फिर देश में बढ़ते वित्तीय अपराधों और शेल कंपनियों के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जहां बड़े पैमाने पर संदिग्ध लेनदेन बिना शुरुआती पकड़ में आए संचालित होते रहते हैं।
