चंडीगढ़। चंडीगढ़ पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कथित रूप से एक रिटायर्ड आर्मी कर्नल को फर्जी APK फाइल के जरिए ₹12 लाख से अधिक की ठगी का शिकार बनाया। यह मामला एक सुनियोजित डिजिटल धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें नकली कूरियर सर्विस के नाम पर लोगों को फंसाया जा रहा था।
यह मामला मार्च महीने में सामने आया, जब 82 वर्षीय रिटायर्ड कर्नल राजबीर सिंह दुग्गल, निवासी चंडीगढ़, ने शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने ऑनलाइन कूरियर पिकअप बुक करने की कोशिश की थी। इसी दौरान उन्हें एक लिंक के जरिए एक APK फाइल डाउनलोड कराई गई, जो कथित तौर पर कूरियर सर्विस से जुड़ी थी।
जांच में सामने आया कि जैसे ही यह मालिशियस APK फाइल मोबाइल में इंस्टॉल हुई, आरोपियों को डिवाइस और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक रिमोट एक्सेस मिल गया। इसके बाद खातों से बिना अनुमति कई ट्रांजैक्शन किए गए और धीरे-धीरे पूरी राशि निकाल ली गई।
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पुलिस ने इस मामले में नवाज वारसी (26) को गिरफ्तार किया है। उसके पास से तीन मोबाइल फोन और “Blue Dart Courier Service” नाम से रजिस्टर्ड एक फर्जी सिम कार्ड बरामद किया गया है। यह सिम कार्ड ठगी की पूरी व्यवस्था को संचालित करने में इस्तेमाल किया जा रहा था।
पूछताछ के दौरान वारसी ने दूसरे आरोपी दिलकश अंसारी उर्फ आदिल (27) का नाम उजागर किया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे फरीदाबाद से 17 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी पहचान के आधार पर बैंक खाते और सिम कार्ड जुटाने की बात स्वीकार की है।
जांच अधिकारियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क लेयर्ड सिस्टम में काम करता था, जिसमें अलग-अलग बैंक खातों और फर्जी पहचान का उपयोग कर ठगी की रकम को ट्रांसफर किया जाता था, ताकि धन के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए। कूरियर ब्रांडिंग का इस्तेमाल भरोसा जीतने के लिए किया जाता था।
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह सिर्फ एक मामला नहीं बल्कि एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो देशभर में सक्रिय हो सकता है। खासकर बुजुर्ग और डिजिटल लेन-देन से कम परिचित लोग इसके प्रमुख निशाने पर होते हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि APK आधारित मालवेयर हमले तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि ये ऐप्स गूगल प्ले स्टोर की सुरक्षा से बाहर होते हैं और आसानी से यूजर्स को धोखा देकर इंस्टॉल कराए जाते हैं।
एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता के अनुसार, “इस तरह के फ्रॉड में सोशल इंजीनियरिंग सबसे बड़ा हथियार होता है। पीड़ित को भरोसे में लेकर फर्जी कूरियर या बैंकिंग अलर्ट दिखाए जाते हैं और फिर धीरे-धीरे उनका डेटा और पैसे निकाल लिए जाते हैं।”
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या थर्ड पार्टी APK फाइल को डाउनलोड न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के जरिए ही कूरियर और बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करें। साथ ही मोबाइल में ‘Unknown Sources’ इंस्टॉलेशन को बंद रखने की सलाह दी गई है।
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं और कुल कितनी रकम की ठगी की गई है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस गिरोह का कोई अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय लिंक भी है।
अधिकारियों ने कहा है कि डिजिटल फोरेंसिक जांच में आईपी लॉग्स, डिवाइस फिंगरप्रिंट और पेमेंट ट्रांजैक्शन ट्रेल्स की मदद से पूरे नेटवर्क को ट्रेस किया जा रहा है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसे फ्रॉड से बचने के लिए सतर्कता और डिजिटल जागरूकता सबसे जरूरी है।
