नई दिल्ली/वॉशिंगटन। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में तेजी से बढ़ते निवेश उत्साह के बीच एक बड़ा घोटाला सामने आया है। अमेरिका की एक टेक कंपनी के पूर्व शीर्ष अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कॉन्ट्रैक्ट, नकली ग्राहकों और बनावटी वित्तीय आंकड़ों के जरिए करीब ₹3,500 करोड़ (लगभग $421 मिलियन) का खेल रचा। इस मामले में भारतीय मूल के पूर्व CEO और CFO पर गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
अमेरिकी न्याय विभाग के आरोपपत्र के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने मिलकर कई वर्षों तक एक सुनियोजित साजिश के तहत कंपनी की आय को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। निवेशकों और कर्जदाताओं को यह विश्वास दिलाया गया कि कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ रहा है और वह AI तकनीक के जरिए शिक्षा और प्रशिक्षण क्षेत्र में क्रांति ला रही है। हालांकि जांच में सामने आया कि कंपनी की कथित कमाई का बड़ा हिस्सा फर्जी सौदों और खुद के नियंत्रित संस्थाओं के जरिए दिखाया गया था।
नकली कॉन्ट्रैक्ट से बनाई ‘सफलता की कहानी’
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने अपने करीबी लोगों, कर्मचारियों और परिवार से जुड़े व्यक्तियों के नाम पर कई शेल कंपनियां खड़ी कीं। इन कंपनियों के साथ करोड़ों रुपये के कॉन्ट्रैक्ट दिखाकर कंपनी की आय को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। इतना ही नहीं, इन कथित ग्राहकों के लिए फर्जी वेबसाइट और डिजिटल प्रोफाइल भी बनाए गए, ताकि निवेशकों को यह भरोसा दिलाया जा सके कि कंपनी के पास मजबूत ग्राहक आधार है।
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आरोप है कि कंपनी के कुछ कर्मचारी खुद को इन फर्जी कंपनियों का CEO या वरिष्ठ अधिकारी बताकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते थे। इस तरह एक पूरा नेटवर्क खड़ा किया गया, जिसने निवेशकों और वित्तीय संस्थानों को भ्रमित कर दिया।
शेयर बाजार में उछाल, फिर भारी गिरावट
बताया गया कि कंपनी ने 2024 में पब्लिक होकर शेयर बाजार में एंट्री की थी। इसके बाद कंपनी के शेयरों में तेज उछाल आया और मार्केट वैल्यू करीब ₹12,000 करोड़ (लगभग $1.5 बिलियन) तक पहुंच गई। निवेशकों को कंपनी की ‘AI आधारित ग्रोथ स्टोरी’ पर भरोसा था।
इसी दौरान कंपनी ने वित्तीय संस्थानों से सैकड़ों करोड़ रुपये का लोन भी हासिल किया। लेकिन अगस्त 2024 में एक निवेश रिसर्च फर्म की रिपोर्ट ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया, जिसमें कंपनी के रेवेन्यू और ग्राहकों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।
रिपोर्ट सामने आते ही कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई और निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। कुछ ही महीनों में कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया में जाना पड़ा।
दिवालियापन और करोड़ों का बकाया
दिसंबर 2024 तक हालात इतने बिगड़ गए कि कंपनी को चैप्टर 11 के तहत दिवालिया संरक्षण लेना पड़ा। बाद में इसे चैप्टर 7 लिक्विडेशन में बदल दिया गया, जो कंपनी के पूरी तरह बंद होने का संकेत है। आरोपपत्र के अनुसार, कंपनी पर ₹415 करोड़ (लगभग $50 मिलियन) से अधिक की देनदारियां बकाया रह गईं और सैकड़ों क्रेडिटर्स प्रभावित हुए।
आरोपियों को मिला भारी आर्थिक फायदा
जांच में यह भी सामने आया कि इस कथित घोटाले के दौरान दोनों आरोपियों ने व्यक्तिगत रूप से भारी लाभ कमाया। पूर्व CEO को कंपनी के शेयरों के रूप में हजारों करोड़ रुपये का फायदा हुआ, जबकि CFO को भी सैकड़ों करोड़ रुपये के शेयर और नकद भुगतान प्राप्त हुए।
जब कंपनी की वित्तीय सच्चाई पर सवाल उठे, तब भी दोनों आरोपियों ने निवेशकों और कर्जदाताओं को गुमराह करने की कोशिश की और आरोपों से इनकार करते रहे।
AI बूम का किया दुरुपयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे मामले में ‘AI का हाइप’ सबसे बड़ा हथियार बना। आरोपियों ने तकनीकी क्रांति और भविष्य की संभावनाओं का हवाला देकर निवेशकों को आकर्षित किया और उसी भरोसे का फायदा उठाया।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि तेजी से उभरते सेक्टरों में निवेश करते समय पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी है। खासकर AI जैसे क्षेत्रों में, जहां संभावनाएं बड़ी हैं, वहीं जोखिम भी उतने ही गहरे हो सकते हैं।
जांच जारी, और नाम आ सकते हैं सामने
आरोपपत्र में यह भी संकेत मिला है कि इस घोटाले में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। कुछ सह-साजिशकर्ताओं की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।
यह मामला न सिर्फ अमेरिकी टेक इंडस्ट्री बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक है—जहां ‘ग्रोथ स्टोरी’ के पीछे छिपे आंकड़ों की सच्चाई को समझना बेहद जरूरी हो जाता है।
