गुवाहाटी। देश में तेजी से फैल रहे संगठित साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे बड़े अभियान में जांच एजेंसी ने एक अहम कड़ी को तोड़ते हुए गुवाहाटी से एक मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान उबैद उल्लाह के रूप में हुई है, जो लंबे समय से फरार चल रहा था और फर्जी सिम कार्ड नेटवर्क के जरिए देशभर में सक्रिय साइबर गिरोहों को ‘अनट्रेसबल’ कम्युनिकेशन मुहैया करा रहा था।
जांच के मुताबिक, यह गिरफ्तारी ऑपरेशन चक्र-V के तहत हुई है, जिसमें एजेंसियां अब केवल ठगी करने वाले अपराधियों ही नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाले नेटवर्क को भी निशाने पर ले रही हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अवैध तरीके से जारी किए गए करीब 10,000 सिम कार्ड की सप्लाई चेन को मैनेज किया, जो बाद में बड़े पैमाने पर साइबर ठगी में इस्तेमाल हुए।
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सूत्रों के अनुसार, आरोपी गुवाहाटी में एक ‘एग्रीगेटर’ के तौर पर काम करता था। उसका मुख्य काम अलग-अलग राज्यों में मौजूद पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंट्स से फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड हासिल करना और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाना था। इसके बदले वह बैंक खातों के जरिए मोटी रकम का लेनदेन करता था। जांच में करीब ₹67 लाख के संदिग्ध ट्रांजैक्शन का खुलासा हुआ है, जो इस नेटवर्क की गहराई और विस्तार को दर्शाता है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए साइबर फ्रॉड, फर्जी लोन ऑफर, और हाई रिटर्न निवेश योजनाओं में किया जा रहा था। इन अपराधों में अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी या बैंक प्रतिनिधि बताकर पीड़ितों को डराते या लालच देते हैं और फिर उनके बैंक खातों से रकम निकाल लेते हैं। चूंकि सिम कार्ड फर्जी पहचान पर जारी होते थे, इसलिए अपराधियों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता था।
इस पूरे नेटवर्क में POS एजेंट्स की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जांच में सामने आया है कि कई एजेंट्स ने नियमों को दरकिनार करते हुए बिना उचित KYC सत्यापन के सिम कार्ड जारी किए। इसके बदले उन्हें कमीशन दिया जाता था। अब तक देश के आठ राज्यों में करीब 45 ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है, जिसमें 10 POS एजेंट्स को गिरफ्तार किया गया है।
तकनीकी जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि फर्जी सिम कार्ड्स को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे यह नेटवर्क और भी संगठित और पेशेवर तरीके से संचालित होता दिखा। एजेंसियां अब इस सप्लाई चेन के अन्य हिस्सों की पहचान कर रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क साइबर अपराध की ‘रीढ़’ होते हैं। “साइबर अपराधी सीधे सामने नहीं आते, बल्कि इस तरह के इनेबलिंग नेटवर्क का सहारा लेते हैं। फर्जी सिम और म्यूल अकाउंट उनके लिए सबसे अहम टूल बन चुके हैं,” ऐसा कहना है प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक इन सपोर्ट सिस्टम्स को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक साइबर ठगी पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल रहेगा।
जांच एजेंसियों ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि नेटवर्क के कई अन्य सदस्य अभी भी फरार हैं। डिजिटल सबूतों और बैंकिंग ट्रेल के आधार पर उनकी तलाश जारी है।
एजेंसी ने आम लोगों से अपील की है कि वे अनजान कॉल्स, संदिग्ध निवेश योजनाओं और ‘सरकारी कार्रवाई’ के नाम पर आने वाले दबाव से सावधान रहें। साथ ही, किसी भी तरह की साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत आधिकारिक हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
इस कार्रवाई को देश में साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक पहल माना जा रहा है, जहां अब फोकस केवल अपराधियों पर नहीं, बल्कि उनके पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने पर है।
