हैदराबाद: रियल एस्टेट सेक्टर में एक और बड़े धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ है, जहां एक बिल्डर दंपती पर दिल्ली की एक कंपनी से ₹14.85 करोड़ की ठगी का आरोप लगा है। शिकायत के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस केस में आरोपी के तौर पर संध्या कंस्ट्रक्शंस के मालिक सारनाला श्रीधर राव और उनकी पत्नी संध्या के नाम सामने आए हैं।
शिकायत के मुताबिक, दिल्ली स्थित एथेना प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड वर्ष 2021 के दौरान हैदराबाद में जमीन खरीदने के अवसर तलाश रही थी। इसी दौरान आरोपी दंपती ने कंपनी से संपर्क किया और खुद को शहर के विभिन्न इलाकों में कई जमीनों का मालिक बताया। आरोप है कि उन्होंने जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए, जिससे कंपनी को विश्वास हो गया कि डील वास्तविक और सुरक्षित है।
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जांच में सामने आया है कि आरोपी दंपती ने कंपनी को आकर्षक प्रस्ताव देकर भारी एडवांस राशि लेने में सफलता हासिल की। बताया जा रहा है कि जमीन के सौदे के नाम पर कंपनी से करीब ₹14.85 करोड़ की रकम ली गई। लेकिन रकम मिलने के बाद न तो जमीन का ट्रांसफर किया गया और न ही कोई वैध प्रक्रिया पूरी की गई। कुछ समय बाद आरोपी संपर्क से बाहर हो गए, जिससे कंपनी को शक हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है।
जब कंपनी की ओर से पैसे वापस मांगने की कोशिश की गई, तो आरोप है कि मुख्य आरोपी ने न केवल भुगतान से इनकार किया, बल्कि धमकी भी दी। इस घटनाक्रम के बाद कंपनी के निदेशक विजय भास्कर ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर केस दर्ज किया गया।
जांच एजेंसियां अब इस मामले में कई अहम पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी फर्म का नाम बाद में बदलकर संध्या होटल्स प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया था। अधिकारियों को संदेह है कि यह कदम संभावित रूप से जांच से बचने और वित्तीय लेनदेन को छिपाने के उद्देश्य से उठाया गया हो सकता है।
इसके अलावा, आरोपी के आपराधिक इतिहास को भी खंगाला जा रहा है। जांचकर्ताओं को कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि आरोपी पहले भी विवादित लेनदेन में शामिल रह चुका है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि के लिए दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
रियल एस्टेट सेक्टर में इस तरह के मामलों को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी रकम के लेनदेन में दस्तावेजों की गहन जांच बेहद जरूरी होती है। कई बार जालसाज नकली या भ्रामक दस्तावेजों के जरिए निवेशकों और कंपनियों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। ऐसे मामलों में कानूनी सलाह और स्वतंत्र सत्यापन की अनदेखी भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस केस में वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस मामले में अन्य लोग या सहयोगी भी शामिल थे। यदि ऐसा पाया जाता है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर संबंधित संपत्तियों को भी अटैच किया जा सकता है, ताकि पीड़ित कंपनी के नुकसान की भरपाई की जा सके। इसके साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी और कानूनी प्रक्रिया को और मजबूत किया जाए।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यह केस एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि बड़े निवेश और प्रॉपर्टी डील में सतर्कता और सत्यापन ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
