रांची: बहुचर्चित सहारा निवेश घोटाले में न्यायिक प्रक्रिया ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले में अदालत ने दो पूर्व जोनल मैनेजर—संजीव कुमार और सुंदर झा—के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने अभियोजन पक्ष को 20 अप्रैल से गवाही पेश करने का निर्देश दिया है, जिससे इस मामले में ट्रायल की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (आपराधिक न्यास भंग), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यास भंग), 420 (धोखाधड़ी) और 34 (साझा आपराधिक मंशा) के तहत आरोप तय किए हैं। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह मामला ट्रायल के योग्य है और आरोपियों को इसका सामना करना होगा।
जांच एजेंसी के अनुसार, झारखंड के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का लालच देकर धन जुटाया गया। आरोप है कि इस योजना के तहत लोगों को भरोसा दिलाया गया कि उनकी जमा राशि पर हर महीने निश्चित आय के साथ बोनस भी मिलेगा। इसी तरह के एक मामले में एक निवेशक से ₹10 लाख जमा कराए गए और बदले में हर महीने ₹12,500 की राशि तथा अतिरिक्त लाभ देने का वादा किया गया। शुरुआती दो महीनों तक भुगतान किया भी गया, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ, लेकिन इसके बाद अचानक भुगतान बंद कर दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपितों ने न केवल निवेशकों को गुमराह किया, बल्कि जुटाई गई रकम को अन्य कंपनियों में डायवर्ट कर दिया। इस तरह यह पूरा मामला सिर्फ धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठित वित्तीय गबन का रूप लेता गया। अधिकारियों के अनुसार, राज्य भर में करीब 123 निवेशकों से ₹135 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई गई, जिसमें से अधिकांश रकम वापस नहीं की गई।
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इस मामले में आरोपियों की भूमिका को अहम माना गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि संजीव कुमार और सुंदर झा निवेशकों से धन जुटाने और उसे विभिन्न चैनलों के माध्यम से स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल थे। दोनों के खिलाफ पहला मामला 30 नवंबर 2024 को दर्ज किया गया था, जबकि दूसरा मामला वर्ष 2025 में सामने आया।
गिरफ्तारी की बात करें तो संजीव कुमार को 28 जुलाई 2024 को बाढ़ क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था, जबकि सुंदर झा को 22 अगस्त 2024 को मधुबनी से पकड़ा गया। तब से दोनों न्यायिक हिरासत में हैं। बाद में उन्हें अलग-अलग मामलों में अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब इस मामले में गवाहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। अभियोजन पक्ष 20 अप्रैल से अपने गवाहों को पेश करेगा, जिनके बयानों के आधार पर मामले की दिशा तय होगी। माना जा रहा है कि इस दौरान कई निवेशक और संबंधित दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए जाएंगे, जो पूरे घोटाले की परतें खोल सकते हैं।
यह मामला एक बार फिर निवेश योजनाओं के नाम पर होने वाली ठगी के खतरों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचे रिटर्न का लालच अक्सर लोगों को जोखिम का आकलन किए बिना निवेश करने के लिए प्रेरित करता है, जिसका फायदा उठाकर इस तरह के संगठित नेटवर्क काम करते हैं। ऐसे मामलों में सतर्कता और वित्तीय जागरूकता बेहद जरूरी है।
फिलहाल, अदालत में शुरू होने वाली गवाही इस पूरे मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण होगी। यदि आरोप साबित होते हैं, तो आरोपियों को कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, पीड़ित निवेशकों को भी न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
