फर्जी खर्च दिखाकर रिफंड बढ़ाने का आरोप; संगठित साजिश में टैक्स सिस्टम को करोड़ों डॉलर का नुकसान, सजा पर अंतिम फैसला बाकी

क्लाइंट्स के नाम पर फर्जी टैक्स रिटर्न: भारतीय मूल के 4 अकाउंटेंट्स पर US में शिकंजा

Roopa
By Roopa
5 Min Read

अमेरिका के टेक्सास राज्य में एक बड़े टैक्स फ्रॉड मामले में चार भारतीय मूल के अकाउंटेंट्स पर गंभीर कानूनी शिकंजा कसा गया है। आरोप है कि इन लोगों ने अपने क्लाइंट्स के नाम पर फर्जी टैक्स रिटर्न दाखिल कर अमेरिकी सरकार को करोड़ों डॉलर का नुकसान पहुंचाया। इस मामले में सभी आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और अब अदालत में सजा की प्रक्रिया जारी है।

अधिकारियों के अनुसार, इस केस में शामिल चारों व्यक्तियों की पहचान सुब्हाला सुरेश, मैथ्यूज चाको, अनिश पिल्लई और मौ कुंडू के रूप में हुई है। कोर्ट रिकॉर्ड्स में इस पूरे मामले को एक संगठित साजिश के रूप में दर्ज किया गया है, जिसमें लंबे समय तक फर्जी बिजनेस खर्च दिखाकर टैक्स सिस्टम को गुमराह किया गया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों ने क्लाइंट्स की टैक्सेबल इनकम कम दिखाने के लिए व्यवसायिक खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, जिससे उन्हें अवैध रूप से अधिक टैक्स रिफंड प्राप्त हुआ। कई मामलों में यह फर्जी जानकारी बिना क्लाइंट्स की पूरी जानकारी के दाखिल की गई, जबकि कुछ मामलों में उन्हें अधूरी या गलत जानकारी देकर प्रक्रिया में शामिल बताया गया।

सबसे पहले सुब्हाला सुरेश ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए माना कि उनकी गतिविधियों से अमेरिकी सरकार को लगभग 2.5 लाख डॉलर से 5.5 लाख डॉलर तक का नुकसान हुआ है। उन्हें अधिकतम तीन साल की जेल, सुपरवाइज्ड रिलीज और वित्तीय दंड का सामना करना पड़ सकता है।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

मुख्य आरोपी माने जा रहे मैथ्यूज चाको पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर फर्जी बिजनेस खर्चों का इस्तेमाल कर टैक्स देनदारी कम की और रिफंड बढ़ाया। अधिकारियों के अनुसार, उनकी वजह से 3.5 मिलियन डॉलर से 9.5 मिलियन डॉलर तक का कर नुकसान हुआ है। इस मामले में उन्हें पांच साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

अनिश पिल्लई और मौ कुंडू ने भी फर्जी टैक्स रिटर्न दाखिल करने की बात स्वीकार की है। पिल्लई पर 1.5 मिलियन डॉलर से 3.5 मिलियन डॉलर तक के नुकसान का आरोप है, जबकि कुंडू पर 2.5 लाख डॉलर से 5.5 लाख डॉलर तक के कर नुकसान का मामला दर्ज है। दोनों को अधिकतम तीन साल की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि हालांकि चारों आरोपी अलग-अलग क्लाइंट्स के लिए काम कर रहे थे, लेकिन उनके द्वारा अपनाए गए तरीके, दस्तावेजों की संरचना और फर्जी खर्च दिखाने के पैटर्न में समानता पाई गई। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने इसे एक संगठित साजिश करार दिया।

अमेरिकी अभियोजकों ने कहा है कि इस धोखाधड़ी के चलते संघीय सरकार को कुल मिलाकर करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ है। गलत रिफंड जारी होने से टैक्स सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

सभी आरोपियों की सजा पर अंतिम सुनवाई अभी बाकी है। अदालत उनके अपराध की गंभीरता, वित्तीय नुकसान की मात्रा और भूमिका के आधार पर अंतिम सजा तय करेगी।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में टैक्स प्रोफेशनल्स पर अब पहले से कहीं अधिक सख्ती बरती जा रही है, खासकर उन मामलों में जहां क्लाइंट्स के भरोसे का दुरुपयोग कर फर्जी रिटर्न दाखिल किए जाते हैं।

इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) ने पिछले कुछ वर्षों में ऐसी धोखाधड़ी पर निगरानी और कड़ी कर दी है। डिजिटल ऑडिटिंग और डेटा एनालिटिक्स के जरिए संदिग्ध टैक्स फाइलिंग की पहचान तेजी से की जा रही है।

यह मामला भारतीय मूल के प्रोफेशनल समुदाय के लिए भी एक सख्त संदेश माना जा रहा है कि टैक्स फ्रॉड किसी भी देश, राष्ट्रीयता या पृष्ठभूमि के बावजूद गंभीर अपराध है और इसके लिए कड़ी सजा तय है।

फिलहाल, अदालत में सजा की प्रक्रिया जारी है और आने वाले समय में इस बहुचर्चित मामले पर अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा।

हमसे जुड़ें

Share This Article