नई दिल्ली: मशहूर गेम डेवलपर कंपनी रॉकस्टार गेम्स एक बड़े साइबर सुरक्षा विवाद के केंद्र में आ गई है, जहां कथित हैकर समूह ‘ShinyHunters’ ने दावा किया है कि उन्होंने कंपनी के सिस्टम में सेंध लगाकर संवेदनशील डेटा चुरा लिया है। समूह ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी फिरौती की मांग पूरी नहीं की गई, तो वे यह डेटा सार्वजनिक कर देंगे। इस धमकी के लिए 14 अप्रैल 2026 की डेडलाइन तय की गई है, जिससे वैश्विक गेमिंग और साइबर सुरक्षा जगत में हलचल मच गई है।
हालांकि रॉकस्टार गेम्स ने इन दावों को गंभीरता से लेते हुए भी इसे कमतर बताया है। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, यह एक थर्ड-पार्टी डेटा ब्रीच का मामला है, जिसमें केवल सीमित और गैर-आवश्यक कॉरपोरेट जानकारी तक ही पहुंच बनाई गई है। कंपनी ने साफ कहा है कि इस घटना का न तो उनके ऑपरेशंस पर कोई प्रभाव पड़ा है और न ही खिलाड़ियों या आगामी प्रोजेक्ट्स पर कोई असर देखा गया है।
हैकर्स समूह ‘ShinyHunters’ ने आरोप लगाया है कि उन्होंने रॉकस्टार के क्लाउड-आधारित डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया, जिसमें Snowflake डेटा वेयरहाउस और एक थर्ड-पार्टी एनालिटिक्स टूल के माध्यम से अनधिकृत पहुंच हासिल की गई। समूह का दावा है कि यह घुसपैठ एक संगठित तरीके से की गई और इसके जरिए कंपनी के अंदरूनी डेटा तक पहुंच बनाई गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हैकर्स ने स्पष्ट रूप से धमकी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो चोरी किया गया डेटा ऑनलाइन प्रकाशित कर दिया जाएगा, जिससे कंपनी को अतिरिक्त सुरक्षा और प्रतिष्ठा संबंधी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। समूह ने इसे “फाइनल वार्निंग” बताते हुए कहा है कि 14 अप्रैल के बाद कोई बातचीत नहीं होगी।
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इस बीच, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमले अब केवल साधारण डेटा चोरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह कंपनियों को ब्लैकमेल करने और वैश्विक स्तर पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा बन चुके हैं। क्लाउड-आधारित सेवाओं और थर्ड-पार्टी इंटीग्रेशन के बढ़ते उपयोग ने ऐसे हमलों की संभावना को और अधिक जटिल बना दिया है।
इस मामले पर साइबर विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. Triveni Singh ने कहा कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ा खतरा सोशल इंजीनियरिंग और क्लाउड एक्सेस मिसकन्फ़िगरेशन होता है। उनके अनुसार, “आज के साइबर अपराधी सीधे सिस्टम को हैक करने के बजाय कमजोर कड़ी यानी थर्ड-पार्टी सर्विसेज और यूज़र एक्सेस पाथ को निशाना बनाते हैं। कई बार कंपनियों को पता भी नहीं चलता कि उनका डेटा कब एक्सपोज़ हो गया।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे हमलों में डेटा लीक के बाद डार्क वेब पर उसका दुरुपयोग कई गुना बढ़ सकता है।
जानकारी के अनुसार, यह समूह पहले भी बड़े साइबर हमलों और डेटा चोरी के मामलों से जुड़ा रहा है और इसे एक संगठित साइबर क्राइम नेटवर्क के रूप में देखा जाता है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि इसी तरह के समूह ने पहले गेमिंग इंडस्ट्री में बड़े लीक और डेटा चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है, जिससे कंपनियों को भारी नुकसान हुआ था।
रॉकस्टार गेम्स ने अपने बयान में यह भी दोहराया है कि उनकी आगामी परियोजनाएं, जिनमें बहुचर्चित GTA 6 शामिल है, पूरी तरह सुरक्षित हैं और इस घटना का विकास प्रक्रिया या रिलीज शेड्यूल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। कंपनी ने भरोसा जताया है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल मजबूत हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
गेमिंग इंडस्ट्री में GTA 6 को लेकर पहले से ही भारी उत्साह है, और ऐसे समय में इस तरह की साइबर धमकियों ने चिंता और चर्चा दोनों को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती डेटा सुरक्षा के साथ-साथ प्रतिष्ठा प्रबंधन भी होता है।
फिलहाल, कंपनी और साइबर सुरक्षा एजेंसियां मिलकर इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि हैकर्स के पास वास्तव में कितना संवेदनशील डेटा है और क्या वे अपनी धमकी को अमल में लाते हैं या नहीं।
