लंदन: ब्रिटेन में एक बड़े बीमा धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ है, जहां भारतीय मूल के एक पूर्व पुलिसकर्मी ने अदालत में स्वीकार किया है कि वह एक सुनियोजित “क्रैश-फॉर-कैश” नेटवर्क का हिस्सा था। इस घोटाले में जानबूझकर सड़क दुर्घटनाएं कराकर बीमा कंपनियों से फर्जी क्लेम के जरिए करीब £33,000 (लगभग ₹35 लाख) की ठगी करने का आरोप है।
यह मामला इसलिए और गंभीर हो गया है क्योंकि इसमें एक पूर्व कानून प्रवर्तन अधिकारी की भूमिका सामने आई है, जिस पर आरोप है कि उसने अपनी स्थिति और संपर्कों का उपयोग कर एक संगठित आपराधिक नेटवर्क के साथ मिलकर काम किया।
42 वर्षीय आरोपी ने अदालत में स्वीकार किया कि वह उस समूह का हिस्सा था, जिसने पहले से योजना बनाकर सड़क दुर्घटनाएं कराईं और उनके आधार पर फर्जी बीमा दावे दाखिल किए। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि यह एक संगठित गिरोह था, जिसमें कई लोग मिलकर दुर्घटनाओं की साजिश रचते और झूठे दावे प्रस्तुत करते थे।
अदालती कार्यवाही में यह भी सामने आया कि आरोपी उस समय भी पुलिस सेवा में कार्यरत था, जब वह इस साजिश में शामिल हुआ। बाद में आंतरिक जांच के बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद वह ब्रिटेन छोड़कर फरार हो गया और लंबे समय तक विदेश में छिपा रहा। बाद में उसे जॉर्जिया से प्रत्यर्पित कर ब्रिटेन लाया गया, जहां उसने सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया।
मामले में सामने आए एक प्रमुख घटनाक्रम के अनुसार, 11 मार्च 2016 को एक डिलीवरी वैन को जानबूझकर एक कार के पीछे टकराने दिया गया। यह पूरी घटना पहले से तय योजना का हिस्सा थी। इस कार में आरोपी भी मौजूद था। इस टक्कर के बाद समूह ने चोट और वाहन नुकसान के नाम पर फर्जी बीमा दावे दायर किए, जिनकी कुल राशि £33,000 (लगभग ₹35 लाख) से अधिक थी। हालांकि, जांच एजेंसियों की समय रहते कार्रवाई के कारण केवल एक छोटी राशि ही जारी हो सकी।
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जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी एक कार रेंटल व्यवसाय से जुड़ा था, जहां लग्जरी गाड़ियों को फाइनेंस पर लेकर ऐसे लोगों को किराए पर दिया जाता था, जो सामान्य रूप से इन वाहनों के लिए योग्य नहीं होते थे। इसी दौरान एक मर्सिडीज कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इसके बाद आरोपी और उसके सहयोगियों ने झूठा दावा किया कि उनके व्यवसाय स्थल पर चोरी हुई है और कार की चाबी गायब हो गई, ताकि बीमा क्लेम को वैध ठहराया जा सके। इस फर्जीवाड़े के जरिए उन्हें £16,000 (करीब ₹17 लाख) से अधिक का भुगतान मिला।
आगे की जांच में यह भी पाया गया कि इसी नेटवर्क से जुड़ी कई अन्य गाड़ियां अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं और ट्रैफिक उल्लंघनों में शामिल थीं। आरोपियों ने बचने के लिए यह झूठा दावा किया कि वाहन क्लोन कर लिए गए हैं। एक अन्य मामले में फर्जी पुलिस शिकायत दर्ज कराकर आधिकारिक सिस्टम में गलत जानकारी भी डाली गई, ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि यह कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क था, जिसमें कई लोग शामिल थे। इस नेटवर्क के कई आरोपी पहले ही दोषी ठहराए जा चुके हैं, जबकि कुछ अभी भी फरार हैं।
आरोपी पर धोखाधड़ी की साजिश, झूठे दावे, न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने और कंप्यूटर सिस्टम के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। उसने अदालत में सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया है, जिससे मामले में उसकी भूमिका पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।
अब अदालत ने इस मामले में सजा सुनाने की तारीख 2 जून तय की है। माना जा रहा है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में सख्त सजा हो सकती है, क्योंकि इसमें एक पूर्व पुलिस अधिकारी की भूमिका सामने आई है, जिसने व्यवस्था का दुरुपयोग कर संगठित बीमा धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
