हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक बड़े निवेश घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां एक दंपति पर आरोप है कि उन्होंने ‘Nafa Gold Scheme’ नामक फर्जी निवेश योजना के जरिए निवेशकों से करीब ₹7 करोड़ की ठगी की। इस मामले में साइबराबाद आर्थिक अपराध शाखा (EOW) पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार यह पूरा नेटवर्क एक सुनियोजित निवेश धोखाधड़ी मॉडल पर काम कर रहा था, जिसमें लोगों को सोने में सुरक्षित निवेश और कम समय में अधिक रिटर्न का लालच दिया जाता था। शुरुआती चरण में निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए नियमित मासिक रिटर्न भी दिए गए, लेकिन बाद में अचानक सभी भुगतान बंद कर दिए गए, जिसके बाद शिकायतें सामने आने लगीं।
मामले की शुरुआत तब हुई जब गाचीबोवली स्थित एक निजी सॉफ्टवेयर कंपनी के निदेशक को जाकिर हुसैन नामक व्यक्ति से मिलवाया गया। जाकिर हुसैन ने दावा किया कि वह ‘Nafa Barters’ और ‘Trade FXSP’ नामक कंपनियों का संचालन करता है और ये कंपनियां निवेश व ट्रेडिंग गतिविधियों में शामिल हैं।
आरोप है कि जाकिर हुसैन ने पीड़ित को यह भरोसा दिलाया कि ₹1 करोड़ का निवेश कुछ ही समय में ₹3 करोड़ में बदल सकता है, साथ ही नियमित मासिक लाभ भी मिलेगा। इस भरोसे में आकर पीड़ित ने जनवरी 2025 में ₹2 करोड़ का निवेश कर दिया।
इसी दौरान जाकिर हुसैन की पत्नी फातिमा और उनके सहयोगी कार्तिक (कोयंबटूर निवासी) ने ‘Nafa Gold Scheme’ नामक एक और निवेश योजना शुरू की। इस योजना में दावा किया गया कि यह सोने पर आधारित सुरक्षित निवेश है और इसमें उच्च रिटर्न की गारंटी है। इस स्कीम के भरोसे में आकर पीड़ित ने अतिरिक्त ₹64 लाख का निवेश किया।
पुलिस जांच में सामने आया कि मई 2025 तक निवेशकों को नियमित रिटर्न देकर भरोसा बनाए रखा गया, लेकिन इसके बाद सभी भुगतान अचानक रोक दिए गए और आरोपी संपर्क से बाहर हो गए।
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जब निवेशकों ने अपना पैसा वापस मांगना शुरू किया तो उन्हें लगातार टालमटोल, बहाने और झूठे आश्वासन दिए गए। आगे की जांच में संकेत मिले हैं कि इसी तरह कई अन्य लोगों से भी ठगी की गई है, जिससे यह मामला एक बड़े संगठित वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
पीड़ित की शिकायत के आधार पर साइबराबाद EOW पुलिस ने जाकिर हुसैन, फातिमा और कार्तिक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं बल्कि एक संगठित निवेश फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो अलग-अलग नामों से योजनाएं चलाकर लोगों को फंसाता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने अलग-अलग कंपनियों और निवेश योजनाओं का इस्तेमाल कर निवेशकों को भ्रमित किया और फर्जी रिटर्न दिखाकर भरोसा कायम किया। पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और फंड ट्रेल की गहन जांच कर रही है ताकि पूरी रकम का पता लगाया जा सके।
अधिकारियों का अनुमान है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले का दायरा ₹7 करोड़ से भी अधिक हो सकता है, क्योंकि और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।
इस बीच, इस तरह के बढ़ते साइबर और निवेश फ्रॉड मामलों पर टिप्पणी करते हुए प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आधुनिक निवेश धोखाधड़ी अब बेहद जटिल और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि ठग अब निवेशकों को फंसाने के लिए मनोवैज्ञानिक रणनीतियों, फर्जी डिजिटल डैशबोर्ड और तयशुदा भुगतान पैटर्न का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे लोग आसानी से विश्वास कर लेते हैं।
फिलहाल पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान तेज कर दिया है और यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस घोटाले के पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है जो अलग-अलग शहरों में इसी तरह की योजनाएं चला रहा है।
