अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़; 11 मोबाइल, 4 लैपटॉप, 24 सिम समेत हथियार बरामद, ‘सॉफ्ट ड्रिंक सप्लाई’ के नाम पर ₹1 करोड़ से ज्यादा की ठगी

‘Just Dial से जाल, करोड़ों का कमाल’: पढ़ाई के नाम पर बने ठग, 8 गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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बागपत: पढ़ाई के लिए बड़े शहरों में पहुंचे युवाओं द्वारा संगठित साइबर ठगी गिरोह चलाने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बागपत पुलिस ने शनिवार सुबह चमरावल मार्ग से अंतरराज्यीय ठग गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो “सॉफ्ट ड्रिंक सप्लाई” के नाम पर लोगों को निशाना बनाकर एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुके थे। आरोपियों के पास से हथियारों के साथ बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण और फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिससे इस गिरोह के संगठित और सुनियोजित तरीके से काम करने का खुलासा हुआ है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म “Just Dial” पर फर्जी विज्ञापन डालकर ग्राहकों को अपने जाल में फंसाता था। जब कोई व्यापारी या ग्राहक सस्ते दाम पर सॉफ्ट ड्रिंक खरीदने के लिए संपर्क करता, तो आरोपी खुद को सप्लायर बताकर भरोसा जीत लेते थे। इसके बाद एडवांस पेमेंट के नाम पर मोटी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते और फिर मोबाइल नंबर बंद कर फरार हो जाते थे।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब बली गांव के एक कारोबारी संदीप अग्रवाल ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उन्होंने विज्ञापन देखकर संपर्क किया और सॉफ्ट ड्रिंक की बड़ी खेप बुक कर दी। आरोपियों ने उन्हें बाजार से कम कीमत पर माल देने का लालच दिया। झांसे में आकर कारोबारी ने करीब ₹2.15 लाख एडवांस के रूप में ट्रांसफर कर दिए, लेकिन न तो सामान मिला और न ही रकम वापस हुई। इसके बाद आरोपी पूरी तरह संपर्क से बाहर हो गए।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का हिस्सा है। साइबर जांच में सामने आया कि इस गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान समेत कई राज्यों में करीब 20 शिकायतें दर्ज हैं। कुल मिलाकर यह गिरोह अब तक ₹1 करोड़ से अधिक की ठगी कर चुका है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अश्वनी, आदित्य सिंह उर्फ लक्की, उत्कर्ष प्रताप सिंह, अंकुर सिंह, आकाश सिंह, आयुष पाल, सुमित और एक अन्य सदस्य के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि गिरोह का सरगना अश्वनी है, जो बीबीए प्रथम वर्ष का छात्र है। बाकी सदस्य भी विभिन्न कोर्स जैसे एमबीए, बीसीए और बीएससी की पढ़ाई कर रहे थे और नोएडा में रहकर इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।

पुलिस ने इनके कब्जे से एक पिस्टल, एक तमंचा, दो कारतूस, एक कार, 11 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, 24 सिम कार्ड, एक टैबलेट और दो एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल ठगी के लिए किया जाता था, जबकि अलग-अलग सिम कार्ड के जरिए पहचान छिपाने की कोशिश की जाती थी।

पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब एक साल से इस तरह की ठगी को अंजाम दे रहे थे। उन्होंने अपने खर्चों और शौक पूरे करने के लिए इस पैसे का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अपने महंगे शौक, गाड़ियों और गर्लफ्रेंड्स पर भी बड़ी रकम खर्च की। एक आरोपी के पास से सोने की चेन की खरीद का बिल मिला, जिसे उसने अपनी गर्लफ्रेंड को गिफ्ट करने की बात कबूल की।

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस गिरोह के कुछ और सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि कई पीड़ितों ने अब तक शिकायत दर्ज नहीं कराई है, जिससे ठगी की वास्तविक रकम और बढ़ सकती है।

फिलहाल, सभी गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और अन्य जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर संगठित तरीके से ठगी को अंजाम दिया जा रहा है, और कैसे कम उम्र के छात्र भी इस अपराध में शामिल हो रहे हैं।

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