अशोक खरात मामले में 130 से अधिक फर्जी बैंक खातों और ₹63 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन की जांच करते अधिकारी।

‘एक गुरु, 130 खाते और ₹63 करोड़’: जांच में सामने आया ठगी का पूरा ब्लूप्रिंट

Team The420
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मुंबई/छत्रपति संभाजीनगर: स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात से जुड़े मामले में जांच ने एक ऐसे संगठित वित्तीय नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसने ‘आस्था’ को ही ठगी का जरिया बना दिया। जांच में सामने आया है कि करीब ₹63 करोड़ की रकम 130 से अधिक फर्जी बैंक खातों के माध्यम से ट्रांसफर की गई, जिनमें से अधिकांश खाते असली खाताधारकों की जानकारी के बिना खोले गए थे। यह पूरा मामला अब एक बड़े और सुनियोजित आर्थिक अपराध के रूप में उभरकर सामने आया है।

जांच में पता चला है कि अशोक खरात ने अपने प्रभाव और लोगों के बीच बनी छवि का इस्तेमाल करते हुए एक विस्तृत नेटवर्क तैयार किया। यह नेटवर्क मुख्य रूप से सहकारी क्रेडिट सोसायटियों—जगदंबा सोसायटी और समता सोसायटी—के जरिए संचालित होता था। इन संस्थाओं में आरोपी और उसके सहयोगियों की भूमिका अहम बताई जा रही है, जहां पद का दुरुपयोग कर बड़ी संख्या में खाते खोले गए और उनके जरिए संदिग्ध लेनदेन किए गए।

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प्राथमिक जांच के अनुसार, आरोपी लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देने और उनकी समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिलाता था। इसी भरोसे के तहत लोग उसे अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो जैसे जरूरी दस्तावेज सौंप देते थे। बाद में इन्हीं दस्तावेजों का कथित तौर पर दुरुपयोग कर उनके नाम पर खाते खोले गए। कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी तब हुई जब जांच एजेंसियों ने उनसे संपर्क किया।

इस घोटाले की गंभीरता तब उजागर हुई जब मुंबई के एक होटल कारोबारी को पता चला कि उनके और उनकी पत्नी के नाम पर बिना जानकारी के खाते खोले गए हैं। इन खातों के जरिए करीब ₹2.43 करोड़ का लेनदेन किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कारोबारी ने धार्मिक कार्यक्रम के लिए जो दस्तावेज दिए थे, उन्हीं का इस्तेमाल इस फर्जी नेटवर्क में किया गया। जांचकर्ताओं को आशंका है कि इस तरह कई और लोगों को निशाना बनाया गया हो सकता है।

जांच एजेंसियों ने इस मामले में एक स्पष्ट ‘मोडस ऑपरेंडी’ की पहचान की है। आरोपी पहले लोगों का भरोसा जीतता, फिर उनके दस्तावेज हासिल करता और उसके बाद विभिन्न क्रेडिट सोसायटियों में उनके नाम पर कई खाते खोल दिए जाते। कई खातों में आरोपी का नाम और मोबाइल नंबर नॉमिनी के रूप में दर्ज पाया गया है, जो उसकी सीधी संलिप्तता को दर्शाता है। इस नेटवर्क में उसके सहयोगी अरविंद पांडुरंग बावके की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जो समता सोसायटी से जुड़ा बताया गया है।

वित्तीय जांच से यह भी सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क 2021 से 2024 के बीच सबसे अधिक सक्रिय था। इसी अवधि में बड़ी संख्या में खाते खोले गए। अब तक सामने आए 130 खातों में से लगभग 100 खाते समता सोसायटी से जुड़े हैं, जबकि बाकी जगदंबा सोसायटी से संबंधित हैं। कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर एक से अधिक खाते खोले गए, जो पहचान के सुनियोजित दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

हालांकि, यह मामला सिर्फ वित्तीय अपराध तक सीमित नहीं है। इसकी शुरुआत यौन शोषण के आरोपों से हुई थी, जब आरोपी से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी हुई और जांच का दायरा बढ़ा। अब इस मामले में धोखाधड़ी, जबरन वसूली और अन्य आपराधिक धाराएं भी जोड़ी गई हैं। अब तक कुल 13 आपराधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

जांच एजेंसियों ने अब तक करीब 20 खाताधारकों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें सभी ने इन खातों के बारे में अनभिज्ञता जताई है। फिलहाल खातों का फॉरेंसिक ऑडिट किया जा रहा है, ताकि पैसों के पूरे प्रवाह का पता लगाया जा सके और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान हो सके।

अशोक खरात, उसकी पत्नी और सह-आरोपी अरविंद बावके के खिलाफ जांच जारी है। शुरुआती निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक और संगठित आर्थिक अपराध नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो लंबे समय से धार्मिक आस्था के नाम पर संचालित हो रहा था।

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