भिंड से सागर तक फैला मामला, अवैध खनन और झूठे केस में पुलिस कर्मियों की भूमिका की आशंका; विभागीय जांच तेज

MP में पुलिस-भूमिका पर बड़ा सवाल: रेत खनन और ₹6 करोड़ वसूली मामले में CID की दोहरी जांच शुरू

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By Roopa
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भोपाल: मध्य प्रदेश में पुलिस तंत्र की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) की विजिलेंस विंग ने पिछले दो दिनों में दो अलग-अलग मामलों में प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) शुरू की है। दोनों ही मामलों में पुलिसकर्मियों की कथित संलिप्तता, अवैध गतिविधियों और वसूली जैसे आरोप सामने आए हैं।

पहला मामला भिंड जिले के सिंध नदी क्षेत्र में कथित अवैध रेत खनन से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला सागर जिले में एक एनडीपीएस केस में कथित तौर पर गलत फंसाने और ₹6 करोड़ की वसूली की मांग से संबंधित है। दोनों मामलों ने राज्य पुलिस व्यवस्था के भीतर जवाबदेही और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रेत खनन के नेटवर्क में पुलिस की भूमिका की जांच

भिंड जिले में सामने आए मामले में आरोप है कि स्थानीय स्तर पर कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से सिंध नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन का नेटवर्क संचालित हो रहा था। शिकायतों के बाद मामले की आंतरिक जांच शुरू की गई और एक पुलिस आउटपोस्ट प्रभारी को फील्ड ड्यूटी से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, शुरुआती इनपुट में यह संकेत मिले हैं कि खनन गतिविधियों पर नियंत्रण रखने की बजाय कुछ स्थानों पर संरक्षण देने जैसी भूमिका भी संदिग्ध रूप से सामने आ सकती है। हालांकि, अभी यह प्रारंभिक जांच का हिस्सा है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। जांच के दौरान खनन क्षेत्र, परिवहन नेटवर्क और स्थानीय सूचना तंत्र की भी गहन पड़ताल की जा रही है।

सागर में NDPS केस और ₹6 करोड़ की कथित मांग

दूसरा मामला सागर जिले के मोती नगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां अगस्त 2025 में दर्ज एक एनडीपीएस केस को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक कोलकाता निवासी व्यवसायी ने शिकायत में कहा है कि उनके दामाद, जो शराब व्यापार से जुड़े हैं, को गलत तरीके से ड्रग्स तस्करी के मामले में फंसाया गया।

शिकायत के अनुसार, इस मामले में कई राज्यों—दिल्ली, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र—के कुछ लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। व्यवसायी परिवार का आरोप है कि मामले को “सेटल” करने या कमजोर करने के नाम पर उनसे ₹6 करोड़ की मांग की गई और लगातार फोन कॉल के जरिए दबाव बनाया गया।

बताया जा रहा है कि इस केस में गिरफ्तारियां पहले भी हो चुकी हैं और जांच के दौरान कई संदिग्ध कड़ियां सामने आई हैं। अब परिवार ने पुलिस मुख्यालय और अन्य एजेंसियों को शिकायत देकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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गिरफ्तारी और नेटवर्क की कड़ियां

जानकारी के अनुसार, इसी केस से जुड़े एक आरोपी को फरवरी 2026 में दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। जांच में यह भी सामने आ रहा है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जिसमें अलग-अलग राज्यों के लोग शामिल हो सकते हैं।

जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या यह मामला झूठे केस, दबाव बनाकर वसूली और प्रभावशाली नेटवर्क के दुरुपयोग से जुड़ा है। डिजिटल कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और मोबाइल डेटा को जांच के दायरे में लिया गया है।

विभागीय सख्ती और “जीरो टॉलरेंस” नीति

राज्य में भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही जा रही है। इसी क्रम में CID की विजिलेंस विंग ने दोनों मामलों में प्रारंभिक जांच दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्तर पर संलिप्तता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जांच का दायरा बढ़ा, कई खुलासों की संभावना

जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों मामलों की प्रकृति अलग होने के बावजूद एक सामान्य पैटर्न यह है कि पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर गंभीर संदेह जताया गया है। ऐसे में अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और संबंधित जिलों में रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और नाम सामने आ सकते हैं और जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ेगी। फिलहाल दोनों मामलों को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच जारी है।

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